
हरियाणा :नेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल के महासचिव डॉ. राजेश शर्मा ने प्रेस विज्ञिति में गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मौजूदा समय में मंत्रियों और उच्च अधिकारियों द्वारा आम नागरिकों के पत्रों की उपेक्षा लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों पर सीधा प्रहार है। शर्मा ने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों को न तो समय पर पढ़ा जा रहा है, न ही उनके समाधान के लिए कोई ठोस प्रयास हो रहे हैं।
शर्मा ने बताया कि कुछ दशक पहले तक सरकारी कार्यालयों में नागरिकों के पत्रों पर शीघ्र कार्रवाई करना एक सामान्य प्रक्रिया थी। लेकिन अब यह परंपरा लगभग समाप्तप्राय हो चुकी है। लोकतंत्र में शासन तंत्र की जवाबदेही केवल चुनावों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि निरंतर जनता के प्रति उत्तरदायी रहना उसकी अनिवार्य जिम्मेदारी है।
नेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल की प्रमुख टिप्पणियाँ व मांगें:
नागरिकों की शिकायतों की अनदेखी उनके संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है।
प्रत्येक विभाग में जन पत्र निगरानी तंत्र की स्थापना अनिवार्य की जाए।
प्रत्येक पत्र को ट्रैकिंग नंबर दिया जाए ताकि उसकी प्रक्रिया पारदर्शी व सार्वजनिक बनी रहे।
पत्रों के उत्तर के लिए निर्धारित समय-सीमा लागू हो तथा लापरवाही के लिए अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
मंत्रियों एवं अधिकारियों की जन उत्तरदायित्व परीक्षा प्रतिवर्ष कराई जाए।
शर्मा ने कहा कि “डिजिटल युग में भी यदि नागरिकों की आवाज़ को अनसुना किया जा रहा है तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता की गंभीर कमी को दर्शाता है। संवादहीनता लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है और शासन व्यवस्था पर जनता का विश्वास डगमगाने लगता है।”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी स्थिति बनी रही तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण और निरंकुश शासन की ओर बढ़ते खतरे का संकेत होगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि नेशनल ह्यूमन राइट्स काउंसिल शीघ्र ही इस मुद्दे पर राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान चलाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग व सर्वोच्च न्यायालय का भी ध्यान आकर्षित करेगी। शर्मा ने कहा हमारा लोकतंत्र तभी सशक्त रहेगा जब प्रत्येक नागरिक की आवाज़ को गंभीरता से सुना और उसका समाधान किया जाएगा
