अपनों का साथ और सुहाना सफर..

asiakhabar.com | June 24, 2025 | 5:16 pm IST

वंदना घनश्याला
हर व्यक्ति अपने कार्य में बहुत ही व्यस्त रहता हैl और इस व्यस्तता से जब समय मिलता है तो हम अपने भाई बंधु रिश्तेदारों से जब मिलते हैं तो लगता है शायद हमें और समय बिताना चाहिएl
विशेष रूप से गर्मी की छुट्टियों में जब हम सब परिवार में मिलते हैं तो उस समय का आनंद ही कुछ और होता हैl
जिस समय की हम बात करते हैं कि समय ही नहीं मिलता?? वही समय उस समय की गोद में न जाने पंख लगा कर किस समय में दौड़ जाता है, पता ही नहीं चलता l
1 वर्ष के बाद और न जाने कई लोग कितने वर्षों के बाद छुट्टियों में आपस में मिलते हैं तो वह समय बेहद सुहावना हो जाता हैl बचपन की यादें तरो ताजा हो जाती हैं,वही बचपन की मौज मस्ती मार पिटाई सब याद आती हैं l
जब जीवन में अपनों का साथ मिल जाता है तो सफर और भी सुहावना हो जाता है और पता ही नहीं चलता कि वह समय कब पँख लगा कर उड़ जाता हैl
शायद हम पुराने समय को ढूंढते हैं और समय हमें कहीं और ले जाता है l जब जीवन के ऊंचे नीचे रास्ते तय करने पड़ते हैं तो अपनों का साथ भी उन रास्तों को कहीं सरल बना देता हैl
बचपन से जुड़े अनेक किस्से हम याद करते हैं और उन्हीं के माध्यम से अपने बचपन की गलियों में एक मोड़ मुड़ जाते हैंl
एक बेफिक्री और कहीं भागदौड़ की चिंता नहीं और हम सरलता से जीवन बिताते हैंl
ना सुबह का अलार्म और ना ही सुबह उठने की चिंताl जब जहाँ मनचाहा वहाँ बैठकर अपने कार्य करते हैं इन्हीं चीजों को व्यक्ति अपने हर कार्य में याद करता हैl
जीवन में चाहिए ही क्या बस? अपनों का साथ मिले और एक सुहाना सफर कट जाए वही जिंदगी हैl आइए मिलकर जीवन को सुंदर सुहावना बनाएँ और हर वर्ष इसी तरह छुट्टियों को मनाते रहें l प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में अपनों का साथ रहे और सुहावना सफर यूं ही चलता रहे.


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