
नई दिल्ली, देश विदेश में नागरी लिपि का प्रचार प्रसार करने वाली प्रतिनिधि संस्था नागरी लिपि परिषद की आस्ट्रेलिया इकाई ने एक काव्यात्मक नागरी संध्या का सफलतापूर्वक आयोजन किया।इसकी अध्यक्षता नागरी लिपि परिषद के महामंत्री एवं न्यूयॉर्क अमेरिका से प्रकाशित वैश्विक हिंदी पत्रिका सौरभ के प्रधान संपादक डॉ हरिसिंह पाल ने की। नागरी लिपि परिषद की आस्ट्रेलिया इकाई की प्रभारी संयोजक डॉ सुनीता शर्मा के कुशल संचालन में न्यूजीलैंड, सिंगापुर, नाइजीरिया, आस्ट्रेलिया, मॉरीशस और भारत के नागरी प्रेमी कवि कवयित्रियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। गोष्ठी का शुभारंभ गाजियाबाद की नागरी लिपि की वैज्ञानिकता पर शोध कार्य करने वाली नागरी अध्येता डॉ रश्मि चौबे की सरस्वती वंदना और नागरी वंदना -” मेरे देश का नाम बढाएगी नागरी, राष्ट्र को एकता में बांधेगी नागरी। राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय बनेगी नागरी,सुपठित , वैज्ञानिक है लिपि नागरी,सब भाषाओं को अपनाने को तैयार हैं नागरी ” से हुआ। इसके पश्चात नागरी लिपि परिषद के संयुक्त मंत्री- कार्यालय एवं भागलपुर, बिहार निवासी श्री अरुण कुमार पासवान ने ” श्रेष्ठतम लिपि नागरी का हम नागरी जन हम करें वंदन, हैं पृथक पृथक किए हुए हैं मित्रो इसमें स्वर- व्यंजन।”और बनारस के पूर्व सहायक अभियंता श्री मोहन द्विवेदी ने ‘ जयति नागरी लिपि जय गान,इसका वंदन इसका मान ‘ सुमुधर नागरी लिपि वंदना प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
इस नागरी लिपि काव्य गोष्ठी में न्यूजीलैंड की नागरी हिंदी प्रचारक श्रीमती रूपा सचदेव ने न्यूजीलैंड की भाषा में क्योरा कह कर अभिवादन कर अपना काव्य पाठ प्रस्तुत किया। सिंगापुर की श्रीमती चित्रा गुप्ता और नाइजीरिया की श्रीमती शशि महाजन ने नागरी लिपि और हिंदी की महत्ता पर केंद्रित काव्य पाठ किया। तत्पश्चात सिडनी ,आस्ट्रेलिया की श्रीमती मंजू अग्रवाल ने भी नागरी हिंदी की महत्ता पर केंद्रित काव्य पाठ प्रस्तुत किया । मॉरिशस से जुड़ीं पूर्व प्राचार्या डॉ शारदा प्रसाद ने भी नागरी लिपि की महत्ता को प्रदर्शित करते हुए अपनी कविता सुनाई। कार्यक्रम संयोजक डॉ सुनीता शर्मा ने काव्यात्मक शैली में संचालन करते हुए नागरी हिंदी की महत्ता दर्शाते हुए अपना लोकप्रिय गीत सुनाया। इस अवसर पर श्री मोहन द्विवेदी ने भोजपुरी में एक कजरी- ‘ झकझोर बरसात, झूला झुले आधी रात, रोजी रोटी में कजरी भुलाया गइल,सावन सुखाय गइल ना ।’ सुनाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। केंद्रीय हिंदी निदेशालय, भारत सरकार के पूर्व उप निदेशक डॉ भगवती प्रसाद निदारिया ने नागरी लिपि परिषद की उपलब्धियों में चार चांद लगाने श्रेय डॉ पाल को दिया। उन्होंने विश्व लिपि के रूप में नागरी लिपि को स्थापित करने पर बल दिया।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ हरिसिंह पाल ने राष्ट्रीय एकता और विश्व बंधुत्व के लिए नागरी लिपि की महत्ता को रेखांकित किया और नागरी लिपि परिषद की राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही अमेरिका, कनाडा, नार्वे और मॉरिशस से भी नागरी लिपि संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।
इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में माॉरीशस के डॉ सोमदत्त काशीनाथ, भारत से डॉ हरीश कुमार सिंह भदोरिया, डॉ अर्जुन गुप्ता, शैलेश चंद्राकर, प्रतीक्षा मेहता, डॉ पूनम सपरा और और पत्रकार श्री सोनू कुमार आदि अनेक नागरी लिपि प्रेमियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
