रेडियो प्रसारण आज भी प्रासंगिक हैं – डॉ पाल

asiakhabar.com | July 25, 2025 | 5:40 pm IST

नई दिल्ली, ” रेडियो ने भारत में अपने प्रसारणों के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हरित क्रांति और श्वेत क्रांति आकाशवाणी प्रसारणों से ही सफलीभूत हो पाईं हैं। सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के कार्यक्रमों के जरिए इन प्रसारणों ने बहुजन हिताय बहुजन सुखाय का महती कार्य किया है। ” उक्त विचार आकाशवाणी के पूर्व वरिष्ठ प्रसारक और नागरी लिपि परिषद के महामंत्री डॉ हरिसिंह पाल ने आरजेएस सकारात्मक मीडिया द्वारा ‘ बदलते युग में प्रसारण की भूमिका ‘ विषय पर आयोजित आयोजित आभासी संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। प्रसार भारती के सलाहकार डॉ रवीन्द्र कुमार त्यागी ने मुख्य वक्ता और आकाशवाणी के पूर्व सहनिदेशक श्री अरुण कुमार पासवान ने विशिष्ट वक्ता के रूप में अपनी आकाशवाणी सेवा के संस्मरण साझा किए। आरजेएस सकारात्मक मीडिया के संस्थापक श्री उदय कुमार मन्ना के कुशल संचालन में सूरीनाम की कवयित्री सुश्री सान्द्रा लुटावन, तिरुवनंतपुरम, केरल की डॉ सीजे प्रसन्न कुमारी, गजरौला के गिनीज बुक रिकॉर्डधारी श्री राम सिंह बौद्ध, जिन्होंने 1500 से अधिक रेडियो सेटों का संग्रह किया है, अमरोहा की श्रीमती शशि त्यागी, श्रीमती स्वीटी पाल, सोनू कुमार, मुजफ्फरपुर की रजनी प्रभा, राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, सरिता कपूर, देवास के दयाराम मालवीय,सुदीप साहू, कविता परिहार ने भी अपने विचार और अनुभव साझा किए। सभी ने एक स्वर से रेडियो की महत्ता को रेखांकित किया। संगोष्ठी में ओडिशा से उमेश कुमार प्रजापति, पूर्व उप निदेशक डॉ भगवती प्रसाद निदारिया, चेन्नई के एस अनंत कृष्णन, आईसीसीआर के वरिष्ठ कार्यक्रम निदेशक सुनील कुमार सिंह,दूरदर्शन अधिकारी मो इसहाक खां, बीकानेर के शिक्षक डॉ रामचंद्र स्वामी, डॉ पूजा सिंह, राजीव मिश्रा, रायपुर छत्तीसगढ़ की डॉ अवन्तिका शर्मा, ऋचा मिश्रा सहित अनेक रेडियो प्रेमी बुद्धिजीवियों की उपस्थिति सराहनीय रही। धन्यवाद ज्ञापन सह आयोजक देवास मध्यप्रदेश के दयाराम मालवीय ने प्रस्तुत किया।


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