राजभाषा के साथ समझें देश की भाषा और अभिलाषा : डॉ. सुनील चौरसिया’सावन’

asiakhabar.com | September 2, 2025 | 5:36 pm IST

नई दिल्ली। पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय गांगरानी, कुशीनगर में राजभाषा प्रशिक्षण का आयोजन हुआ जिसमें डॉ. सुनील चौरसिया ‘सावन’, स्नातकोत्तर शिक्षक (हिन्दी) ने विद्यालय के समस्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें राजभाषा को समझने से पूर्व देश की भाषा एवं देशवासियों की अभिलाषा को समझना बहुत जरूरी है। उन्होंने भारत का नक्शा दिखाकर बताया कि पत्राचार का माध्यम हिन्दी/अंग्रेजी हो या द्विभाषी, इसे ध्यान में रखते हुए पूरे भारतवर्ष को समूह क, ख और ग में विभाजित किया गया है।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर की भाषा के सन्दर्भ में चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि हजारों वर्ष पूर्व वहां अलंकार संप्रदाय के प्रवर्तक आचार्य भामह, दण्डी, उद्भट, रूद्रट, वामन और मम्मट जैसे संस्कृत आचार्य हुआ करते थे। एक जमाना था जब जम्मू-कश्मीर संस्कृत का गढ़ हुआ करता था जो आज अंग्रेजी का गढ़ हो चुका है। यही कारण है कि यह राज्य समूह ग के अन्तर्गत आता है जो राजभाषा हिन्दी के लिए शुभ संकेत नहीं है।
उन्होंने राजभाषा अधिनियम 1963 का जिक्र करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू की मंशा पर विस्तार से प्रकाश डाला। सुनील ने भारत का नक्शा दिखाकर हिंदीभाषी राज्यों एवं अहिंदीभाषी राज्यों में बोली जाने वाली बोलियों एवं भाषाओं में अंतर स्पष्ट करते हुए वहां के साहित्यकारों के संदर्भ में भी बताया। राजभाषा अधिनियम 1976 के संदर्भ में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि समस्त केंद्रीय कर्मचारियों को राजभाषा से संबंधित महत्वपूर्ण 12 नियमों का ज्ञान होना चाहिए। हमें गर्व से हिन्दी में हस्ताक्षर करने की जरूरत है। हिन्दी हमारी राजभाषा है। अहिन्दी भाषी राज्यों अर्थात् पूर्वोत्तर भारत एवं दक्षिण भारत में भी हिन्दी का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार होना चाहिए और वहां भी अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी में भी पत्राचार होना चाहिए। सुनील चौरसिया ने रोचक शैली में राजभाषा के सन्दर्भ में समझाते हुए कहा कि भारत हमारी माता है जिसका हृदय क्षेत्र है हिन्दी क्षेत्र।
अन्त में सभी कर्मचारियों को सम्बोधित करते हुए प्राचार्य उमेश पाण्डेय ने कहा कि हमें सभी भाषाओं एवं बोलियों का सम्मान करते हुए शत्-प्रतिशत कार्य राजभाषा हिन्दी में करने की ज़रूरत है। समस्त केन्द्रीय कर्मचारियों को राजभाषा से संबंधित नियमों की जानकारी होनी चाहिए। इन नियमों का अनुपालन भी अत्यावश्यक है।


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