
हरी राम यादव
जो कहे सिंहासन वही लिखो,
काहे को मन से लिखते हो।
तुम भी उसी रंग में रंग जाओ,
ख़बरी अलग क्यों दिखते हो।।
चल रहे साथ जो उनको देखो,
आज उनका क्या रौला है।
गाड़ी बंगला और पद प्रतिष्ठा,
भविष्य भी उनका धवला है।।
प्रश्न वही करो जो मन भाए,
प्रश्न तुम्हारा क्या कर लेगा।
जनता की बातें तुम क्यों करते,
क्या प्रश्न जन का दुख हर लेगा।।
प्रश्नों से न तो सड़क बनेगी,
न गिरते पुल रूक जाएंगे।
न भ्रष्टाचार रुकेगा प्रश्नों से,
प्रश्न बस प्रश्न रह जाएंगे।।
मुंह में मिसरी घोल मिलो,
लेकर उत्तर का बंडल साथ।
उन्नति दिन दिन रात चौगुनी,
होगा वरदहस्त तुम्हारे माथ ।।
