
भावनगर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि विश्व की शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत को आत्मनिर्भर बनना ही होगा। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आत्मनिर्भरता को सबसे बड़ा मंत्र मानना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के भावनगर में ‘समुद्र से समृद्धि’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस अवसर पर 34,200 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल भावनगर का नहीं, बल्कि पूरे भारत की दिशा तय करने वाला है।
मोदी ने कहा, “140 करोड़ देशवासियों का एक ही संकल्प होना चाहिए—चिप (सेमीकंडक्टर) हो या शिप (जहाज), हमें भारत में ही बनाने होंगे। आत्मनिर्भर होने के अलावा भारत के पास कोई विकल्प नहीं है। हम दूसरों पर आश्रित रहेंगे तो हमारा आत्मसम्मान भी चोटिल होगा। भावी पीढ़ियों के भविष्य को दांव पर नहीं लगाया जा सकता।” उन्होंने कहा कि आज भारत समुद्री क्षेत्र में भी नेक्स्ट जेनरेशन सुधारों की ओर बढ़ रहा है। सरकार ने बड़े जहाजों को आधारभूत संरचना का दर्जा देकर इस क्षेत्र को मजबूती देने का ऐतिहासिक कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया में भारत का कोई बड़ा दुश्मन नहीं है। सच्चे अर्थों में अगर हमारा कोई दुश्मन है तो वह है दूसरे देशों पर हमारी निर्भरता। यही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है और हमें मिलकर इसे खत्म करना होगा। जितनी ज्यादा विदेशी निर्भरता, उतनी ही ज्यादा देश की विफलता। मोदी ने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भर भारत ही सभी समस्याओं का समाधान है। उन्होंने कहा, “सौ दुखों की एक ही दवाई है और वह है आत्मनिर्भर भारत।”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भारत में सामर्थ्य की कभी कोई कमी नहीं रही, लेकिन कांग्रेस ने हमेशा देश के सामर्थ्य को नजरअंदाज किया। आजादी के छह-सात दशक बाद भी भारत वह सफलता हासिल नहीं कर पाया जिसका वह हकदार था। कांग्रेस ने लंबे समय तक देश को लाइसेंस राज में उलझाए रखा और वैश्विक बाजारों से अलग-थलग रखा। जब वैश्वीकरण का दौर शुरू हुआ तो उसने केवल आयात पर भरोसा किया और उसमें भी हजारों करोड़ रुपये के घोटाले किए। इन नीतियों ने हमारे युवाओं को नुकसान पहुंचाया।
मोदी ने कहा कि भारत सदियों से विश्व की एक बड़ी समुद्री ताकत रहा है। भारतीय तटीय राज्यों में बने जहाज दुनिया भर के व्यापार को गति देते थे। 50 साल पहले तक हमारा 40 प्रतिशत व्यापार भारतीय जहाजों पर होता था, लेकिन कांग्रेस की गलत नीतियों से भारत का जहाज निर्माण उद्योग ध्वस्त हो गया। आज स्थिति यह है कि सिर्फ 5 प्रतिशत व्यापार ही भारतीय जहाजों पर होता है और बाकी 95 प्रतिशत के लिए हमें विदेशी जहाजों पर निर्भर रहना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत विदेशी शिपिंग कंपनियों को शिपिंग सेवाओं के किराए के रूप में लगभग 75 बिलियन डॉलर (करीब 6 लाख करोड़ रुपये) का भुगतान करता है, जो भारत के रक्षा बजट के लगभग बराबर है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब तक उसे पूरी तरह आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनना होगा। दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश के तौर पर हमारा कर्तव्य है कि हम न केवल अपने नागरिकों के भविष्य को सुरक्षित करें बल्कि विश्व की शांति और स्थिरता के लिए भी मजबूती से खड़े हों। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल एक आर्थिक रणनीति नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मसम्मान और वैश्विक दायित्व का भी हिस्सा है।
