गुजरात का नल सरोवर भारत में ताजे पानी के बाकी नम भूमि क्षेत्रों से कई मायनों में भिन्न है। सरदियों में उपयुक्त मौसम, भोजन की पर्याप्तता और सुरक्षा ही इन सैलानी पक्षियों को यहां आकर्षित करती है। सरदियों में सैकड़ों प्रकार के लाखों स्वदेशी पक्षियों का जमावड़ा रहता है। इतनी बड़ी तादाद में पक्षियों के डेरा जमाने के बाद नल में उनकी चहचाहट से रौनक बढ़ जाती है। नल में इन्हीं उड़ते सैलानियों की जलक्रीड़ाएं व स्वर लहरियों को देखने-सुनने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां प्रतिदिन जुटते हैं। पर्यटकों के अतिरिक्त यहां पक्षी विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, शोधार्थी व छात्रों का भी जमावड़ा लगा रहता है तो कभी-कभार यहां पर लंबे समय से भटकते ऐसे पक्षी प्रेमी भी आते हैं जो किसी खास पक्षी के छायाचित्र भी उतारने की तलाश में रहते हैं।
अनूठा है नल
नम भूमि क्षेत्र नल सरोवर अपने दुर्लभ जीवन चक्र के लिए जाना जाता है जिस कारण यह एक अनूठी जैवविविधता को बचाए हुए है। नल का वातावरण अनेक प्रकार के जीव जन्तुओं के लिए उपयुक्त है और एक भोजन श्रृंखला बनाता है। मूलतः यह वर्षा जल पर आश्रित एक नम क्षेत्र है। गर्मी में जब यह सरोवर सूखने के कगार पर होता है तो मानसूनी वर्षा इस सरोवर को नई जिंदगी देती है। इसके जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा इसे लबालब कर देती है।
मछलियों का लालच पक्षियों को यहां आकर्षित करता है। आरंभ में यहां छोटे पक्षी ही आते हैं किन्तु जब नवंबर में मछलियां बड़ी हो जाती हैं तो भोजन की प्रचुरता व उचित वातावरण पाकर प्रवासी जल पक्षी भी यहां आने लगते हैं। दिसंबर व जनवरी में इनकी संख्या अधिकतम होती है। फरवरी के अंत में नल में भोजन व जलस्तर में कमी व गर्मी के बढ़ने के चलते मेहमान पक्षी अपने मूल घरों को लौटने लगते हैं।
कल का सागर आज का सरोवर
गुजरात के अहमदाबाद व सुंदर नगर जिलों से सटा नल सरोवर अभयारण्य अहमदाबाद से लगभग 65 किमी की दूरी पर है। वर्षाकाल में जब यह भर जाता है तो 120 वर्ग किमी क्षेत्रफल की विशाल उथली झील में बदल जाता है। आकार में तब भले ही यह विशाल लगता हो किंतु इस सरोवर की गहराई अपने सर्वाधिक विस्तार के समय भी 2.5 मीटर से अधिक नही होने पाती है। इसका कारण यह है कि इससे अधिक मात्रा में जल इस बेसिन से बाहर बह निकलता है। शीतकाल आते-आते यह स्तर घट कर 1 से 1.5 मीटर तक रह जाता है।
क्या और कैसे देखे
नल सरोवर का परिवेश विशिष्ट प्रकार की वनस्पतियों, जल पक्षियों, मछलियों, कीट पतंगों व जीव-जंतुओं की शरण प्रदान करता है। 1969 में अभयारण्य का दर्जा मिलने के बाद से उठाए गए कदमों से इसमें मेहमान विदेशी व स्वदेशी पक्षियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है कभी कुछ हजार तक सीमित रहने वाली संख्या आज 2.5 लाख प्रतिवर्ष से ऊपर ही है। सरोवर क्षेत्र में 225 प्रकार के मेहमान पक्षी तक देखे गए हैं जिनमें से सौ प्रकार के प्रवासी जल पक्षी हैं। इसके अतिरिक्त सरोवर क्षेत्र में 19 प्रकार की मछलियां, 11 प्रकार के सरीसृप, 13 स्तनपायी जानवर मिलने का पता चला है। इनमें से कुछ को घूमते हुए देखा भी जा सकता है। इन पक्षियों में हंस, सुर्खाब, रंग-बिरंगी बतखें, सारस, स्पूनबिल, राजहंस, किंगफिशर, प्रमुख हैं। इनकी बड़ी संख्या आपको सरोवर क्षेत्र में विचरित करती मिल जाएगी। कई बार यहां पर ऐसे पक्षी भी देखे गए हैं जिनको दुर्लभ की श्रेणी में रखा गया है। सरोवर में मौजूद पक्षियों की जिंदगी में मानवीय आवागमन से अधिक हस्तक्षेप न हो इसके लिए एक निश्चित मार्ग से इस सरोवर में घूमने की अनुमति है।
यही कारण है कि जैसे ही आप नल सरोवर के करीब पहुंचते है एक गहरी निशब्दता का अहसास होता है। नल के इर्द-गिर्द ऐसी गतिविधियों की इजाजत नहीं है जिनसे पक्षियों के विचरण में खलल पहुंचता हो। शोर न हो इसलिए सरोवर में मोटरबोट पूर्णतया प्रतिबंधित है। सरोवर की सैर के लिए यहां पर बांस के चप्पुओं से खेने वाली नावें सबसे उपयुक्त हैं जो हर वक्त उपलब्ध रहती है। ये नावें अलग-अलग क्षमता वाली होती है। जैसे ही आप सरोवर में आगे बढ़ते है दूर-दूर मेहमान पक्षी नजर आने लगते हैं। पानी के अन्दर झांकने पर तलहटी में मौजूद जलीय जीवन भी आप देख सकते हैं। सरोवर में आपको निकटतम टापू तक ले जाया जाता है जिस तक आने जाने में दो से तीन घंटे तक लग जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय पहचान दूर नहीं
नमक्षेत्र पशु-पक्षियों व वनस्पतियों के संरक्षण स्थल है जिनकी जैवविविधता को बचाने में अपनी अहम भूमिका होती है। वैश्विक जागरूकता के बाद से भारत में अब तक लगभग 600 नम भूमियों का पता लगाया जा चुका है। इनमें से अभी तक 25 नमभूमि क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता है शीघ्र ही इनमें गुजरात के दो नम भूमि क्षेत्र- नल सरोवर पक्षी अभयारण्य और कच्छ का छोटा रन जो भारतीय जंगली गधे का एकमात्र आवास स्थल है, भी सूची में जुड़ने जा रहे हैं। नल की मान्यता के बाद इसकी व्यवस्था में कुछ और सुधार होने की संभावना है। इसकी सीमा अधिक सुरक्षित हो सकेगी, झील पर आश्रित लोगों के पुनर्वास की दिशा में अधिक प्रगति होगी। झील के आसपास बसे गांवों की निर्भरता कम होने से पक्षियों को बेहतर वातावरण मिल सकेगा। इसके अतिरिक्त अभयारण्य को ग्रीष्मकाल में सूखने से बचाने की योजना भी है जिसके तहत इसमें नहर से सरदार सरोवर योजना से पानी देने की बात है।
कैसे जाएं
नल सरोवर आने के लिए आपको अहमदाबाद आना होता है जो देश के प्रमुख नगरों से अच्छी हवाई व रेल सेवा से जुड़ा है। वहां से बस या टैक्सी से नल सरोवर पहुंचा जा सकता है। साठ किमी दूरी को तय करने में डेढ़ घंटे लग ही जाते हैं। अभयारण्य की सीमा में गुजरात पर्यटन विकास निगम का एक गेस्ट हाउस है जो यहां पर एक रेस्तरां भी चलाता है। यहां पर रुक कर नल के शांत वातावरण का और लुत्फ लिया जा सकता है। एक दिन में यदि आप नल सरोवर के अलावा कुछ और देखना चाहते हों तो सरोवर की सैर के बाद 60 किमी दूर लोथल जा सकते है जहां सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष देखे जा सकते हैं और शाम में अहमदाबाद लौट सकते हैं। अहमदाबाद एक आधुनिक नगर है जहां हर श्रेणी के पर्यटक के लिए हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध है। अहमदाबाद में रहकर कई स्थान देखे जा सकते हैं। गांधी जी के ऐतिहासिक आश्रम साबरमती के अलावा यहां अक्षरधाम मंदिर भी है। भारत की सबसे बड़ी साइंस सिटी अहमदाबाद में ही है। अहमदाबाद में कई मुगलकालीन दर्शनीय इमारतें भी हैं। यदि गुजरात की मेहमानवाजी, वहां के भोजन व संस्कृति से रूबरू होने का आपके पास कम समय है तो रात्रि में विशाला जा सकते हैं जहां पर आपको एक परिसर में सब कुछ देखने को मिल जाएगा।
