आर्का एयरोस्पेस का नवाचार: 3 उन्नत एंटी-ड्रोन सिस्टम प्रदर्शित, 64 इंटरसेप्टर एक साथ ध्वस्त करेंगे दुश्मन के ड्रोन

asiakhabar.com | September 25, 2025 | 5:16 pm IST
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नई दिल्ली। प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है। आईआईटी दिल्ली में आई-हब फाउंडेशन फॉर कोबोटिक्स (आईएचएफसी) के पाँच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित एक प्रदर्शनी में नए स्टार्टअप्स ने अपने अत्याधुनिक उत्पादों का प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शनी रिसर्च इनोवेशन पार्क में लगाई गई, जहाँ दुश्मन के ड्रोन को मार गिराने वाले मिसाइल ड्रोन और जैमर-रोधी ड्रोन जैसे नवाचार आकर्षण का केंद्र रहे। इसी कड़ी में, हैदराबाद स्थित आर्का एयरोस्पेस ने एक उन्नत हार्ड किल एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित कर देश की सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊँचाई दी है।
कम लागत में प्रभावी समाधान: 64 इंटरसेप्टर की क्षमता
आर्का एयरोस्पेस के सीईओ सूरज बोनागिरी ने इस नवाचार के पीछे की प्रेरणा को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दुश्मन के ड्रोन को मार गिराने के लिए मिसाइलों का उपयोग किया गया था, जो भारत के लिए एक महँगा विकल्प साबित हुआ। इस समस्या के समाधान के लिए, कंपनी ने कम खर्च में दुश्मन के ड्रोन को नष्ट करने हेतु नई तकनीकों का उपयोग कर इंटरसेप्ट ड्रोन बनाए हैं। ये इंटरसेप्टर ड्रोन विस्फोटक से लैस होंगे और एक रडार सिस्टम के माध्यम से संचालित होंगे। वे दुश्मन के ड्रोन को स्वयं ट्रैक करके समाप्त कर देंगे। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि एक बार में 64 ऐसे इंटरसेप्टर ड्रोन छोड़े जा सकते हैं, जिससे बड़े खतरे को तुरंत और प्रभावी ढंग से बेअसर किया जा सकता है।
कंपनी के निदेशक सूरज बोनागिरी ने बताया कि इस अनुभव से पता चला कि देश को ऐसे एंटी-ड्रोन सिस्टम की आवश्यकता है जो पारंपरिक महँगी मिसाइलों की तुलना में कम लागत में अधिक प्रभावी हों। इसी उद्देश्य से कंपनी ने तीन प्रमुख उन्नत एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित किए हैं, जो दुश्मन के ड्रोन और सिग्नल जैमर से निपटने में सक्षम हैं।
आर्का एयरोस्पेस के तीन प्रमुख उन्नत एंटी-ड्रोन सिस्टम
1. यूनिवर्सल काइनेटिक इंटरसेप्टर ड्रोन (यूकेआईडी)
यह एक उन्नत निगरानी और इंटरसेप्शन ड्रोन है जो अलॉय ईडी-आईआर-रडार थर्मल कैमरा, डे-कैमरा और कंट्रोल यूनिट से लैस है।
कार्यक्षमता: यह लगातार अंतरिक्ष में दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखता है।
विशेषता: इसकी रेंज 3 किलोमीटर है और यह एक बार में 64 ड्रोन लॉन्च कर सकता है।
सुरक्षा महत्व: यह विशेष रूप से सेना के महत्वपूर्ण क्षेत्रों, वीआईपी मूवमेंट और आर्मी पोजीशन की सुरक्षा के लिए उपयोगी है।
हमले की गति: यूकेआईडी 150 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़कर दुश्मन के ड्रोन के सामने जाकर फट जाता है, जिससे खतरा तुरंत समाप्त हो जाता है।
2. अंजम्बल कामाकाजी यूएवी फाइबर एक्स (जैमर-रोधी)
यह प्रणाली यूकेआईडी ड्रोन में लगी होती है और इसमें फाइबर ऑप्टिक केबल लगी होती है।
कार्यक्षमता: इसका मुख्य कार्य सिग्नल जामिंग की स्थिति में भी लक्ष्य तक पहुँचना सुनिश्चित करना है।
जैमर प्रतिरोध: जब दुश्मन सिग्नल जाम करता है और जीपीएस या कंट्रोल सिस्टम प्रभावित होता है, तब भी यह फाइबर एक्स से नियंत्रित ड्रोन अपने लक्ष्य तक सही दिशा में पहुँच जाता है। यह प्रणाली दुश्मन के जैमर से अप्रभावित रहकर मिशन को सुरक्षित रूप से पूरा करती है।
3. पैरो नेट थ्रो सिस्टम स्काई कैच (सुरक्षित कैप्चर प्रणाली)
यह प्रणाली दुश्मन के ड्रोन को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर फेंकने के लिए बनाई गई है।
सुरक्षा आवश्यकता: पारंपरिक मिसाइल हमलों में यदि दुश्मन का ड्रोन एयरबेस या रनवे के ऊपर फट जाता है, तो उसके टूटे हुए हिस्से रनवे पर गिरकर गंभीर समस्याएँ पैदा कर सकते हैं।
कार्यक्षमता: स्काई कैच ड्रोन के नीचे लगाया जाता है और इसमें लगी चार नालियों में एक विशेष पाउडर होता है, जो तेजी से जाल फेंकता है और दुश्मन के ड्रोन को पकड़ लेता है। फिर इसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया जाता है।
इन तीनों प्रणालियों का विकास भारतीय सेना और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को कम लागत पर एक मजबूत और बहुआयामी एंटी-ड्रोन रक्षा कवच प्रदान करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


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