संविधान की मांग है ,सरकारी कामकाज में नागरी हिंदी का प्रयोग -डॉ हरिसिंह पाल

asiakhabar.com | September 30, 2025 | 5:35 pm IST

नई दिल्ली :भारतीय संविधान के भाग 17 के अनुच्छेद 343(1) में नागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी भाषा को संघ शासन की राजभाषा स्वीकार किया गया है। इस रूप में भारत सरकार के सभी कर्मियों का यह संवैधानिक दायित्व है कि वे अपना सरकारी कामकाज नागरी लिपि और हिंदी भाषा में करें। सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से आज हिंदी भाषा और नागरी लिपि में कार्य करना बहुत ही आसान है। सरकार ने इसके लिए अनेक प्रोत्साहन योजनाएं लागू की हैं।” उक्त विचार नागरी लिपि परिषद के महामंत्री और न्यूयॉर्क, अमेरिका से प्रकाशित वैश्विक हिंदी पत्रिका सौरभ के प्रधान संपादक डॉ हरिसिंह पाल ने एनसीईआरटी के केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत ‘ डिजिटल शिक्षा में हिंदी भाषा और साहित्य ‘ विषय पर प्रधानाध्यापकों और भाषा शिक्षकों के लिए आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। संस्थान के संयुक्त निदेशक प्रो अमरेंद्र प्रसाद बेहरा ने सम्मान स्वरूप पौधा भेंटकर डॉ पाल का स्वागत किया। संस्थान के मीडिया- उत्पादन प्रभाग के विभागाध्यक्ष प्रो डॉ राजेन्द्र पाल और प्रभारी राजभाषा हिंदी प्रकोष्ठ डॉ रवीन्द्र कुमार ने इस द्विदिवसीय हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया । संचालन करते हुए डॉ रवीन्द्र कुमार ने डॉ पाल का परिचय और उनके द्वारा नागरी लिपि और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी प्रतिभागियों को दी। सभी प्रतिभागियों ने करतल ध्वनि से डॉ पाल का अभिनंदन किया।
संयुक्त निदेशक प्रो बेहरा ने बताया कि संस्थान ने हिंदी भाषा को सशक्त बनाने में अनेक प्रयास किए हैं।यह प्रशिक्षण कार्यशाला हिंदी भाषा की समृद्ध परंपरा और आधुनिक आवश्यकताओं के बीच सामंजस्य स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। प्रख्यात भाषाविद और नागरी लिपि विशेषज्ञ डॉ हरिसिंह पाल जी के ज्ञान से हम सभी लाभान्वित हुए हैं।
इस अवसर पर डॉ पाल ने कई प्रतिभागी अध्यापकों की भाषा संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। कुछ अध्यापकों ने अपनी पुस्तकों लोकार्पण भी डॉ पाल से कराया । कुछ प्रतिभागियों ने अंगवस्त्र, डायरी और साहित्य भेंट कर डॉ पाल को सम्मानित किया। धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के मीडिया उत्पादन प्रभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राजेन्द्र पाल ने किया।


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