
हिन्दुस्तान में पति बेचारा एक किस्म का नर मधुमक्खी होता है. |अक्सर वह पत्नी रूपी रानी मधुमक्खी के आगे-पीछे चक्कर काटते हुए पचास-साठ साल की अल्प-अवस्था में ही मोक्ष-अवस्था को प्राप्त कर लेता है | वह दिन भर धूप, आंधी पानी बरसात में मारा-मारा घूम-घूमकर जंगल-झाड़ी के काँटों की परवाह किये बिना फूलों से रस इकट्ठा करता है और शाम को थका-हारा, निढाल लौटकर उसे रानी मधुमक्खी के हवाले कर देता है | मूरख सोचता है कि रानी मक्खी उसे प्यार-दुलार करेगी, उसे शाबासी देगी परन्तु रानी के चेहरे पर बाल बिखराए,श्रृंगार विहीना कोप-भवन की कैकेयी क्रीडा करती दिखाई पड़ती है !पत्नी किसी रेलगाड़ी का सुंदर-रंगीन डीजल इंजिन है तो पति उसका खटारा मालवाहक डब्बा ! पति विरोधी दल का वह तेज तर्रार संसद सदस्य होता है जिसके मुंह पर घर में तो बड़ा सा मजबूत अलीगढ़ी ताला ठुका रहता है लेकिन संसद में जिसकी गर्जना से सत्ता-पक्ष की कुर्सियों की चूलें हिली रहती हैं ! वह बेचारा घर में चूल्हा सुलगाने में काम आता माचिस की अदनी तीली है लेकिन संसद में सत्तापक्ष के हर अच्छे-बुरे निर्णय पर विरोध की आग भड़काने को तैयार पेट्रोल का परम मित्र, पूरा का पूरा माचिस ! वह निशुल्क बंधुवा मजदूर है जिसे सात फेरे के साथ कोई तन्वंगी, मांग में एक चुटकी सिन्दूर के नाम पर आजीवन अपनी और अपने च्याऊ-माऊ की सेवा के लिए उपहार स्वरूप प्राप्त करती है ! वह अगर सेवा में जरा भी कमी करता है तो ट्रम्प रूपी पत्नी उस पर टैरिफ पर टैरिफ लगाती चली जाती है ! उसकी जेब की रोज तलाशी के साथ माल जब्ती एक अनिवार्य संवैधानिक विवाह-प्रक्रिया होती है ! कुटुंब-जांच ब्यूरो को जेबों की तलाशी के साथ उसके मोबाइल का भी गूढ़ और सूक्ष्म-निरीक्षण करने का अधिकार होता है ताकि पता लगाया जा सके कि कहीं बाहर में वह किसी कमलनयनी- पिकबयनी के हनी- ट्रैप का शिकार तो नहीं ? वह बेचारा कितना भी ईमानदार क्यों न हो, उसे भारतीय इलेक्शन कमीशन की तरह कोई भी अल्लू-खल्लू, ”भ्रष्ट-शिरोमणि” की सम्मानित उपाधि से महिमा-मंडित कर सकता है ! पत्नी विपक्षी पार्टियों के समान विवाह-संविधान की परम रक्षक होती हैं और पति बेचारा सत्ता-पक्ष की तरह संविधान हन्ता ! पति-पत्नी का रिश्ता हूबहू गठबन्धन सरकार के समान होता है ! परिवार के सारे सदस्य “पत्नी-जनक्रांति-पार्टी” के रुतबे और दबदबे से भयाक्रांत हो, उसके साथ गठबन्धन के लिए एक पाँव में खड़े रहते हैं. फलत:चुनाव में सारी सीटें और सारे उम्मीदवार उसी के होते हैं ! नतीजा यह होता है कि सरकार सदा “पत्नी-जनक्रांति-पार्टी” की ही बनती है ! सरकार बनने के बाद संविधान के अनुसार “पत्नी-जनक्रांति पार्टी” की मुखिया होने के कारण परम आदरणीया पत्नी जी ही घर के सत्ता-सिंहासन पर शान-मान और ऐंठ के साथ ,इठलाती हुई विराजमान होती हैं | प्रधान-मंत्री भी वही, गृहमंत्री भी वही, वित्त और सुरक्षा मंत्रालय का प्रभार भी उन्हीं का ! कौटुम्बिक बहुमत के कारण उनका ही निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होता है ! बेचारा पति ,अपनी पार्टी ”पति-जनता-दल” की तरफ से जब भी गाहे-बगाहे अपने पक्ष की आवाज उठाने के लिए परिवार-सभा में खड़ा होता है तो उसे बुरी तरह हूट कर बैठा दिया जाता है ! अंत में पति बेचारे को श्रद्धांजलि देते हुए यही कहा जा सकता है—“हे पति,तेरी दुखद कहानी, भर उमंग तू बना था दूल्हा, याद आ रही अब क्यों नानी !” ॐ शान्ति…शान्ति… शान्ति !
