
डॉ.बालमुकुंद पांडे
बिहार विधानसभा का चुनाव मतदाता सूची के’ विशेष गहन परीक्षण ‘ या ‘ स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के अंतर्गत हो रहा है। भारत का निर्वाचन आयोग/ चुनाव आयोग स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है जो भारतवर्ष के संघीय विधायिका एवं राज्यों के विधान मंडलों में स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं पारदर्शी निर्वाचन/ चुनाव कराकर भारत के लोकतंत्र को मजबूती प्रदान किया है। निर्वाचन आयोग के पास स्वयं के कर्मचारी एवं अन्य स्टाफ न होने के बावजूद भी उसके निवेदन पर केंद्र सरकार एवं राज्यों की सरकारें आवश्यक कर्मचारी उपलब्ध कराती है। लोकतंत्र की सफलता नागरिक समाज के लिए आवश्यक होती है। गहन पुनरीक्षण मौलिक स्तर पर मतदाता सूची में दो बार आए नामों को हटाने एवं मृत मतदाताओं के नामों को हटाने के लिए हो रहा है।
विशेष गहन पुनरीक्षण ‘ राष्ट्रहित से जुड़ा विषय है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन है जो राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानता है। स्वयंसेवकों ने व्यक्ति- निर्माण से राष्ट्र – निर्माण की संकल्पना को साकार करने के लिए प्रयासरत रहते हैं। वर्तमान में वोट बैंक की राजनीति के लिए बहुत से राज्यों की सरकारों ने अवैध तरीके से अवैध व्यक्तिओं को भारत में रहने का संरक्षण दे दिए हैं। बांग्लादेश, पाकिस्तान, एवं नेपाल से अवैध घुसपैठी भारत में रह रहे हैं और भारत को अशांत करने, उपद्रव करके भारत के शांति एवं स्थिरता को चुनौती देते हैं। घुसपैठियों की पहचान उजागर करने में स्वयंसेवकों का सहयोग अति आवश्यक है। स्वयंसेवक राष्ट्र प्रेम की भावना से काम करके ‘ विशेष गहन पुनरीक्षण ‘ में सहयोग करेंगे। संघ भारत की एकता ,आंतरिक सुरक्षा, अक्षुण्णता एवं संस्कृति के उन्नयन के लिए काम करता है। स्वयंसेवक अवैध व्यक्तियों व अवैध घुसपैठियों को पहचान कर जिला निर्वाचन अधिकारी को आवेदन देकर मतदाता सूची का संशोधन कराएंगे।
विपक्षी दलों के प्रत्याशियों एवं समर्थकों का कहना है कि सत्तारूढ़ राजनीतिक दल ने बहुत बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं, अल्पसंख्यकों एवं वंचित वर्गों के नाम मतदाता सूची से हटवाए हैं। उन सभी का कहना है कि ‘ विशेष गहन पुनरीक्षण’ के दौरान आधार कार्ड या अन्य दस्तावेजों की मांग से बहुत लोग मताधिकार से वंचित हो चुके हैं ,इसलिए यह मनमाना, भेदभावपूर्ण एवं अवैज्ञानिक है। यह सभी आरोप बेबुनियाद एवं शून्य धरातल पर है। ‘ विशेष सघन पुनरीक्षण ‘ का उद्देश्य मतदाता सूची से उनका नाम हटाना है जो दो जगह मतदाता सूची में है, एवं उनके नाम को हटाना जो मृत हो चुके हैं। निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है जो लोकतंत्र की गतिशीलता के लिए यह अभियान चलाया है। लोकतंत्र में निर्वाचन आयोग रीढ़ है एवं निर्वाचन आयोग की दृष्टि में सभी मतदाता समान है।
भारत के संविधान के अनुच्छेद- 324 में निर्वाचन आयोग को निर्वाचन प्रक्रिया के अधीक्षण ,नियंत्रण एवं निर्देशन का वृहद अधिकार है। निर्वाचन आयोग इसके लिए मतदाता सूची का निरंतर पुनरीक्षित करता है जिससे नए मतदाताओं का नाम जोड़ सके एवं जो मतदाता नहीं रहे, उनका नाम हटाया जा सके। यह सभी कार्य लोकतंत्र की मजबूती के लिए है। स्वयंसेवक राष्ट्रीयता की मजबूती एवं सशक्त संगठित समाज के लिए निरंतर काम करते हैं। ‘ विशेष सघन पुनरीक्षण’ की यज्ञ में संघ अपने ऊर्जा की आहुति देकर सशक्त लोकतंत्र के लिए साधन बनकर कार्य कर रहा है। भारत विविधता पूर्ण संस्कृति वाला देश है । इसमें मतदाताओं के मन और मस्तिष्क में राष्ट्र- प्रेम की भावना का भाव उन्नयन करके लोकतंत्र को मजबूत किया जाता है। ग्रामीण परिवेश में नए अभियान के प्रति जन जागरूकता निम्न होती है। संघ इस जन जागरूकता अभियान के लौ को बढ़ाकर मतदाता सूची को अद्यतन करने में सहयोग कर रहा है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने “लक्ष्मी चरण सिंह बनाम एकेएम हसन”, 1985 के मामले में स्पष्ट किया था कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है एवं स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक है कि यह अनवरत चलती रहे। पूर्व निर्वाचन आयुक्त ओ .पी . रावतजी ने कहा था कि’ विशेष सघन पुनरीक्षण’ करना निर्वाचन आयोग का विशेषाधिकार है। लोकतंत्र में लोकतांत्रिक मूल्यों के उन्नयन एवं सबको राजनीतिक प्रक्रिया एवं राजनीतिक संस्कृति में सहभागिता के लिए अद्यतन मतदाता सूची(Updated voter list) आवश्यक है। वैश्विक स्तर पर भारत वृहद लोकतंत्र है। इस संस्कृति को बनाए रखने के लिए ‘ विशेष सघन पुनरीक्षण’ का होना आवश्यक है। भारत में लगभग 2 करोड़ बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे हैं जो ऑस्ट्रेलिया की पूरी आबादी के बराबर है। 2025 में इनकी संख्या पहले से अधिक हो चुकी है। इन लोगों को भारत से बाहर करने के लिए ‘ विशेष सघन पुनरीक्षण’ आवश्यक है।
निर्वाचन आयोग के अनुसार तेजी से शहरीकरण ,रोजगार के लिए शहरों में पलायन, युवा नागरिकों( जिनकी अवस्था 18 वर्ष हो चुकी है) का मतदान के योग्य होना और अवैध विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल होना ,ऐसे बहुत से कारण हैं जिसके चलते मतदाता सूची का सघन पुनरीक्षण आवश्यक है। इस प्रक्रिया के कारण निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करता है कि किसी गैर- नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल न हो सके। लोकतंत्र के मौलिक आदर्श “एक व्यक्ति – एक मतदान” (One man- One Vote) की सार्थकता को ‘ विशेष सघन पुनरीक्षण ‘ की आवश्यकता है।
लोकतंत्र का मौलिक सिद्धांत ‘ वयस्क मताधिकार ‘ है। इसके अंतर्गत शासक शासित के प्रति जिम्मेदार एवं उत्तरदाई होता है। भारत के संविधान के अनुच्छेद- 326 में उपबंधित है कि लोकसभा( निम्न सदन/ लोकप्रिय सदन) एवं राज्यों के विधायिकाओं का निर्वाचन ‘ वयस्क मताधिकार’ के आधार पर होंगे । भारत का प्रत्येक नागरिक जो 18 वर्ष की उम्र का हो चुका है, जो संघीय विधायिका(संसद ) द्वारा बनाए गए किसी विधि के द्वारा अयोग्य नहीं हुआ हो, मतदान करने का पात्र है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 में निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची तैयार करने के व्यापक प्रावधान है । लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम ,1950 की धारा 16(1) (A ) में प्रावधान है कि जो व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं है उसको मतदाता सूची में पंजीकृत नहीं किया जा सकेगा। इसी अधिनियम की धारा 16(2 ) में कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति जो भारत का नागरिक नहीं है एवं मतदाता सूची में पंजीकृत कर लिया गया है तो निर्वाचन आयोग सघन प्रशिक्षण के दौरान मतदाता सूची से निकाल सकता है। मतदाता का नाम देश में किसी एक स्थान पर ही पंजीकृत हो सकता है, इसलिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण आवश्यक है क्योंकि इससे पता चल जाता है कि वह व्यक्ति उस स्थान का’ सामान्य निवासी ‘ (जनरल रेजिडेंस) है ,जहां पर उसका नाम है।
जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के धारा- 21 के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण करते समय बूथ स्तर के अधिकारियों को तय करना होता है कि मतदाता भारत का नागरिक (सक्षम अधिकारी के द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र) एवं उस निर्वाचन क्षेत्र का निवासी हों। लोकतंत्र के सफलता व उपादेयता बनाए रखने के लिए ‘ विशेष सघन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रत्येक लोकसभा के पश्चात निर्वाचन आयोग द्वारा करवाया जाना चाहिए, जिससे नए मतदाताओं का नाम जुड़ सके एवं मृत मतदाताओं का नाम हटाया जा सके। भारत वैश्विक स्तर का वृहद स्तर का लोकतंत्र है ।इसके गरिमा, आदर्श, एवं मौलिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का पुनरीक्षण आवश्यक है।
राष्ट्रहित के सभी कार्यों में संघ की भूमिका प्रशंसनीय रही है। मतदाता पहचान का कार्य राष्ट्रीय स्तर का है। वैध मतदाता सूची सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला है । लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय सहभागिता विशुद्ध एवं पारदर्शी मतदाता सूची से ही संभव है। भारत एक जिम्मेदार, लोकतांत्रिक, एवं उत्तरदाई लोकतंत्र है । ‘ सघन मतदाता पुनरीक्षण’ से घुसपैठियों एवं किसी अन्य प्रकार से नागरिकता प्राप्त अपने मतदान से वंचित होगा तो वह निर्वाचन प्रक्रिया में दबाव की राजनीति नहीं कर पाएगा। इस कारण प्रत्याशियों के मध्य स्वस्थ प्रतियोगिता होगी जो लोकतंत्र के सफलता के लिए आवश्यक है।
