
नई दिल्ली। भारत में इस समय 65 स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं जो खरीद समझौतों के अभाव में वित्त पोषण के लिए संघर्ष कर रही है। स्वच्छ उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए गठित अंतर्राष्ट्रीय संगठन इंडस्ट्रियल ट्रांजिशन एक्सलरेटर (आईटीए), बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा यहां आयोजित एक कार्यक्रम में जारी रिपोर्ट में यह बात कही गयी है।
‘अनलॉकिंग इंडियाज क्लीन इंडस्ट्रियलाइजेशन ऑपर्च्युनिटी’ शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 65 स्वच्छ परियोजनाओं को साकार करने के लिए 150 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है। इन परियोजनाओं से दो लाख लोगों को रोजगार मिल सकता है।
इनमें से 51 परियोजनाएं रसायन उद्योग में, पांच एल्युमीनियम उद्योग में, चार इस्पात उद्योग में, तीन विमानन उद्योग में और दो सीमेंट उद्योग में हैं। कुल 65 में से मात्र चार परियोजनाओं में परिचालन शुरू हो सका है, दो अंतिम निवेश निर्णय के चरण में है। अन्य 59 की घोषणा हो चुकी है लेकिन अभी काम ज्यादा आगे नहीं बढ़ सका है।
इसके अलावा कार्यक्रम में आईटीए भारत परियोजना समर्थन कार्यक्रम की भी शुरुआत की गयी जिसके तहत आईटीए रिपोर्ट में पहचान की गयी परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए बैंक, उद्योग और सरकार के साथ समन्वय करेगा। घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर फंड जुटाने के लिए उचित परिस्थितियां बनाने की कोशिश की जायेगी।
पूर्व केंद्रीय मंत्री और एवरसोर्स कैपिटल के अध्यक्ष जयंत सिन्हा ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में कहा कि विकसित भारत और हरित भारत एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और विकसित भारत के लिए हरित भारत अनिवार्य है। हमें नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करना ही होगा इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है।
श्री स्कोफील्ड ने कहा कि भारत में नीति निर्माण के स्तर पर सरकार ठीक काम कर रही है। हम नई नीतिगत परिस्थितियों के निर्माण की बात कर रहे हैं। दुनिया में कोई भी देश अबतक ऐसी नीति नहीं बना पाया है जो अपने-आप में पूर्ण हो।
आईटीए ने दुनिया भर में एक हजार से अधिक स्वच्छ औद्योगिक परियोजनाओं की पहचान की है। इसमें चीन (203) और अमेरिका (114) के बाद सबसे अधिक परियोजनाएं भारत में हैं। कुल 65 परियोजनाओं में से 20 ओडिशा में, 10 आंध्र प्रदेश में, गुजरात और कर्नाटक में पांच-पांच, राजस्थान में चार, और तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र में तीन-तीन परियोजनाएं हैं।
