घुटती साँसे.. बढ़ता प्रदूषण..

asiakhabar.com | November 22, 2025 | 5:20 pm IST
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डॉ वंदना घनश्याला
अक्सर कहा जाता है- दिल्ली दिल वालों की है जोकि राजधानी भी है, लेकिन आज दिल्ली का वातावरण साँस लेने लायक नहीं रह गया l आम व्यक्ति की यही धारणा है कि प्रदूषण के कारण यहाँ का वातावरण प्रदूषित हो चुका हैl बड़े बूढ़े बच्चे सभी को कुछ ना कुछ कठिनाई का सामना करना पड़ रहा हैl
घुटती साँसे —
आजकल दिल्ली में आप अक्सर लोगों को मास्क लगाए देख सकते हैं क्योंकि यहाँ की वायु में प्रदूषण बढ़ चुका हैl प्रत्येक चौथे पाँचवे व्यक्ति को आप खाँसते, गला खराब आँखों में जलन और साँस में दिक्कत देख सकते हैंl
कदाचित साहब! यह गाना ही याद आ जाता है..
सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है..इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है..
माना प्रदूषण आज से नहीं बहुत पहले से हम इसे झेलते आ रहे हैं l प्रत्येक समस्या का समाधान ढूँढा जा सकता है l हम इसके लिए कोशिश तो कर ही सकते हैंl आज जबकि दिल्ली में प्रदूषण की मात्रा बढ़ गई है और साँस लेने में भी दिक्कत हो रही है तो हमें इसका कहीं ना कहीं समाधान लाना होगाl
विद्यालय के छात्र और छात्राएँ..
कक्षा में भी काफी बच्चे बीमार नजर आते हैं l जिसमें माता-पिता की चिंता भी शामिल होती हैl सुबह-सुबह बच्चे मास्क लगाकर कक्षा में पेपर लिख रहे होते हैं क्योंकि उनके पास कोई और ऑप्शन नहीं हैl कुछ क्लासेस हाइब्रिड से चल रही है लेकिन वह कोई निश्चित उपाय नहीं हैl यह एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान केवल एक व्यक्ति को नहीं बल्कि हम सबको मिलकर करना हैl चाहे वह विद्यालय के छात्र हों या आम नागरिक होl
आखिर समाधान क्या??
यह समस्या कोई इस प्रकार की समस्या नहीं है कि थोड़े दिनों में ही इसका इलाज मिल जाए l न केवल सरकार बल्कि आम व्यक्ति और हम सब मिलकर यदि इस समस्या पर विचार करें तो कुछ समाधान निकाल सकते हैंl
* प्लास्टिक थैलियों का प्रयोग ना करेंl
* जूट बैग का प्रयोग करें, यदि हो सके तो कपड़े का बैग लेकर जाएँ l
* अधिक से अधिक मिलकर हमें पेड़ लगाने ही नहीं बल्कि उनकी देखरेख भी करनी है l
* जनसंख्या पर कंट्रोल भी हमें ही करना होगा क्योंकि जितनी कम जनसंख्या होगी उतना ही कम संसाधनों का प्रयोग होगा इस प्रकार खपत कम होगी तो पेड़ों की कटाई भी कम होगी और प्रदूषण कम होगा l
* ए. सी.और कार का प्रयोग तभी करें जब आवश्यकता हो या मिलकर कार पोलिंग कर के जाएँ l
* अपने आसपास कचरा ना फैलाएँ और सूखा और गीला वेस्ट अलग-अलग करेंl
उपसंहार..
अंत में यही कहा जा सकता है कि हमें आने वाली पीढ़ी के लिए भी संसाधनों को बचाना होगा तभी वह जीवन में कुछ कर सकेंगे l जब हम ही उनके हिस्से के संसाधन प्रयोग करते जाएँगे तो वह आगे क्या प्राप्त करेंगे?? आएँ मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें l यह कार्य केवल सरकार का ही नहीं बल्कि हम सबको करना होगाl आज दिल्ली के जो हालात बिगड़ रहे हैं उन्हें सुधारने में मिलकर प्रयास करेंl
“दिल्ली में प्रदूषण को हटाना होगा
हर नागरिक को आगे आना होगा”


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