विश्व पुस्तक मेला 2026 में निःशुल्क प्रवेश का निर्णय केवल एक प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और बौद्धिक क्रांति- दिनेश वर्मा

asiakhabar.com | January 7, 2026 | 4:52 pm IST

नई दिल्लीः- किताबों के शौकीनों के लिए बड़ी खबर है। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 का आयोजन 10 जनवरी से 18 जनवरी तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया जा रहा है। इस बार मेले में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा। निःशुल्क प्रवेश के निर्णय को पेनडाउन प्रेस के संस्थापक दिनेश वर्मा ने ऐतिहासिक बताया है। दिनेश वर्मा ने कहा कि विश्व पुस्तक मेला जाने के लिए इस बार टिकट खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सह मेला आयोजन भारत व्यापार संवर्धन संगठन आईटीपीओ के साथ सहमति बना भारतीय पुस्तक न्यास एनबीटी ने पहली इस बार मेले में निःशुल्क प्रवेश रखने का निर्णय लिया है।
पेनडाउन प्रेस के संस्थापक दिनेश वर्मा ने कहा कि विश्व पुस्तक मेला नई दिल्ली 2026 में निःशुल्क प्रवेश का निर्णय केवल एक प्रशासनिक सुविधा नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और बौद्धिक क्रांति की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। यह फैसला इस बात को दर्शाता है कि हमारे देश में ज्ञान, साहित्य और विचारों को किसी आर्थिक सीमा में नहीं बाँधा जा सकता। किताबें समाज की आत्मा होती हैं। जब पुस्तक मेले जैसे बड़े मंच पर प्रवेश निःशुल्क होता है, तो वह छात्र, युवा, शिक्षक, लेखक, उद्यमी और सामान्य पाठक—सभी के लिए समान अवसर का द्वार खोलता है। यह पहल उन लाखों लोगों तक किताबों की पहुँच सुनिश्चित करती है, जो पढ़ना चाहते हैं लेकिन आर्थिक या सामाजिक कारणों से ऐसे आयोजनों से दूर रह जाते हैं। आज के डिजिटल और तेज रफ्तार दौर में, जहाँ ध्यान भटकना आसान है, वहीं पुस्तक मेले का निःशुल्क प्रवेश लोगों को फिर से किताबों की ओर लौटने का आमंत्रण देता है। यह पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करता है और विचारशील समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है।
विश्व पुस्तक मेला केवल किताबों की खरीद–फरोख्त का स्थान नहीं है, बल्कि यह विचारों का संगम, संवाद का मंच और भविष्य की सोच को आकार देने वाला आयोजन है। निःशुल्क प्रवेश इसे और अधिक समावेशी, जीवंत और प्रभावशाली बनाता है। मेरा मानना है कि इस तरह के निर्णय देश में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, रचनात्मकता और बौद्धिक विकास को नई गति देते हैं। विश्व पुस्तक मेला नई दिल्ली 2026 का निःशुल्क प्रवेश आने वाली पीढ़ियों के लिए पढ़ने, सोचने और लिखने की प्रेरणा बने—यही इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *