
नई दिल्ली।अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने आज जारी एक बयान में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्थिरता और विश्वसनीयता उसके संवैधानिक मूल्यों, संस्थागत संतुलन और नागरिक अधिकारों के सम्मान पर आधारित होती है।
शर्मा ने कहा कि मानवाधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र संस्थाओं की भूमिका लोकतंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण है। इन मूल्यों का संरक्षण समाज में विश्वास, पारदर्शिता और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर उभरने वाले विषयों और परिस्थितियों को लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर संवेदनशीलता एवं विधिसम्मत तरीके से संबोधित किया जाना आवश्यक है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल का निरंतर प्रयास रहा है कि सभी पक्षों के साथ संवाद और सहयोग के माध्यम से मानवाधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक न्याय को प्रोत्साहित किया जाए। काउंसिल का मानना है कि संवाद, संस्थागत समन्वय और संवैधानिक प्रक्रियाओं के पालन से ही स्थायी समाधान संभव हैं।
शर्मा ने संबंधित सभी पक्षों से अपील की कि वे लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक मर्यादाओं और विधि के शासन को सुदृढ़ करने की दिशा में सामूहिक प्रयास करें, ताकि एक समावेशी, संतुलित और उत्तरदायी समाज का निर्माण हो सके।
उन्होंने कहा,
“लोकतंत्र की मजबूती संवाद, सहयोग और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान से सुनिश्चित होती है। मानवाधिकारों का संरक्षण समाज की सामूहिक चेतना का परिचायक है।”
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार काउंसिल भविष्य में भी संवैधानिक मूल्यों, मानव गरिमा और सामाजिक संतुलन के संरक्षण हेतु रचनात्मक भूमिका निभाती रहेगी।
