
इंजी. अतिवीर जैन * पराग *
अंग्रेजों ने जब 1905 में बंगाल को दो भागों में बांट दिया तो लालाजी ने सुरेंद्रनाथ बनर्जी और विपिन चंद्र पाल के साथ मिलकर अंग्रेजों के इस फैसले का विरोध किया l आपने देशभर में स्वदेशी वस्तुएं अपनाने के लिए भी अभियान चलाया l 1907 में आपको कांग्रेस पार्टी में शामिल होने के कारण बिना मुकदमा चलाएं बर्मा जेल में भेज दिया गया l पर लालाजी का संघर्ष नहीं रुका l 1914 में अपने वकालत छोड़ दी l और यूनाइटेड किंगडम की यात्रा की l 1917 में संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा की l अक्टूबर 1917 में अपने न्यूयॉर्क में इंडियन होमरूल लीग ऑफ अमेरिका की स्थापना की l आप 1917 से 1920 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में रहे l सन 1920 में कोलकाता के अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए l अपने 1920 में रॉलेट एक्ट के विरोध में गांधी जी के द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ शुरू हुए गए असहयोग आंदोलन में सहयोग किया l पूरे पंजाब में य़ह आंदोलन फैल गया l और लाला लाजपतराय को पंजाब का शेर और पंजाब केसरी जैसे नाम से पुकारा जाने लगा l 1921 में आपने लाहौर में सर्वेंट ऑफ द पीपल समिति की स्थापना की l
1921 से 1923 तक आपको जेल में रखा गया l जेल से रिहा होने पर पंजाब से विधानसभा के लिए चुने गए l
1927 में अपने अपनी मां के नाम पर गुलाब देवी मेमोरियल अस्पताल बनवाया l जो अभी पाकिस्तान में सबसे बड़े अस्पताल में से एक है l और जिसमें एक समय में 2000 से अधिक मरीजों का इलाज किया जाता है l
1928 में ब्रिटेन सरकार द्वारा भारत की राजनीतिक स्थिति पर रिपोर्ट देने के लिए सर जानसाइमन की अध्यक्षता में साइमन कमीशन का गठन किया गया l जिसका भारतीय राजनीतिक दलों ने बहिष्कार किया l क्योंकि इसमें कोई भारतीय सदस्य शामिल नहीं था l लालाजी ने *साइमन गो बैक * का नारा दिया l आपने 1928 में कांग्रेस में एक प्रस्ताव रखा जिसमें संवैधानिक परिवर्तन पर ब्रिटेन सरकार द्वारा बनाए गए साइमन कमीशन के बहिष्कार का आह्वान किया l जब तीन फरवरी 1928 को साइमन कमीशन भारत पहुंचा तो पूरे देश में विरोध की ज्वाला भड़क उठी l साइमन वापस जाओ के नारे गूंज उठे l अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का विरोध किया गया l साइमन कमीशन के लाहौर आने पर 30 अक्टूबर 1928 को लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध में लाजपत राय ने शांतिपूर्ण रैली का नेतृत्व किया l साइमन कमीशन के खिलाफ आंदोलन में अंग्रेजों ने लाला लाजपतराय पर लाठियां बरसाईं और वह बुरी तरह घायल हो गए l तब आपने कहा था मेरे शरीर पर होने वाला एक-एक ब्रिटिश वार ब्रिटिश शासन के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा l और उनकी बात सच सिद्ध हुई l अंग्रेजों के प्रहार से बुरी तरह घायल लाला लाजपतराय बच नहीं सके और 17 नवंबर 1928 को उनकी मृत्यु लाहौर में हो गई l जो कि वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब में है l आपकी हत्या का बदला लेने के लिए 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह ,सुखदेव और राजगुरु ने अंग्रेजी पुलिस ऑफिसर जेम्स ए स्कॉट की हत्या कर लाला जी की हत्या का बदला लिया l
लाजपतराय क्रांति के द्वारा भारत की स्वाधीनता चाहते थे ,ना कि अंग्रेजो के रहम पर l इसी कारण उनकी उदारवादी कांग्रेसियों से नहीं बनती थी l लाजपतराय ने बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल के साथ मिलकर अंग्रेजों का खुला विरोध किया l इनकी जोड़ी लाल , बाल, पाल नाम से जानी जाती थी l पंजाब केसरी के नाम से लोकप्रिय लाला लाजपतराय एक सच्चे स्वतंत्रता सेनानी, लेखक ,राजनीतिक ,समाज सुधारक थे l जिन्होंने अपने बलिदान से देश के युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में जुड़ने की प्रेरणा दी l उनकी कही हुई बात सत्य सिद्ध हुई l और अंग्रेजों को भारत छोड़ने को मजबूर होना पड़ा l उनके 161 वे जन्मदिन पर नमन करते हुए उनके बताए हुए रास्तों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी l
