केंद्रीय मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने नई दिल्ली में एनएमपीएफ चिंतन शिविर का उद्घाटन किया

asiakhabar.com | February 12, 2026 | 3:57 pm IST

नई दिल्ली। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (एनएमपीबी) ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में औषधीय वनस्पतियों पर एक दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों, उद्योग जगत के नेताओं और राज्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया और स्थायी नियमों और नवाचार के माध्यम से औषधीय पादप क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से नीति, अनुसंधान और कार्यान्वयन रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने मुख्य अतिथि के रूप में चिंतन शिविर का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि औषधीय वनस्पति न केवल भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों की नींव हैं, बल्कि इसकी जैविक और आर्थिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों को मिल रही बढ़ती वैश्विक स्वीकृति यह प्रदर्शित करती है कि भारत गुणवत्तापूर्ण औषधीय वनस्पतियों और पौधों पर आधारित स्वास्थ्य उत्पादों का एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की क्षमता रखता है
उन्होंने कहा कि चिंतन शिविर का विषय सरकार के विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सतत आजीविका के माध्यम से ग्रामीण समुदायों का सशक्तिकरण करना है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि औषधीय वनस्पतियों का क्षेत्र किसानों, उद्यमियों और शोधकर्ताओं को एक स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत के लिए सहयोग करने के अनूठे अवसर प्रदान करता है। उद्घाटन सत्र के दौरान, उन्होंने एनएमपीबी के 25 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में स्मारिका, टेरेस गार्डन पुस्तिका का विमोचन किया और सीएसआईआर-सीआईएमएपी, लखनऊ द्वारा विकसित एनासाइक्लस पाइरेथ्रम की एक नई किस्म का भी अनावरण किया। उन्होंने एनएमपीबी और एआईआईए के बीच सहयोगात्मक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर प्रक्रिया में भी भाग लिया।
श्री जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में सरकार ने औषधीय वनस्पतियों की खेती और उनके सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई पहल शुरू की हैं। उन्होंने बताया कि एनएमबीपी जैसी संस्थाएं किसानों को विशेष रूप से वर्षा आधारित और कम उपजाऊ जमीन पर उच्च मूल्य वाली औषधीय फसलें उगाने में सहायता कर रही हैं। इन प्रयासों से न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जन स्वास्थ्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय संबंधित हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल के लिए क्षेत्रीय सुविधा केंद्रों, अनुसंधान साझेदारियों और डिजिटल संपर्कों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। शिक्षा जगत, उद्योग और किसानों के बीच सहयोग पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि इस चिंतन शिविर से प्राप्त परिणाम इस क्षेत्र को अधिक उत्पादकता, समावेशिता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने हेतु एक पंवर्षीय रोडमैप का आधार प्रदान करेंगे।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *