दिल्ली कैंट,पालम वायु सेना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों से भेंट करके प्रो.मनोज कुमार कैन ने किया शैक्षणिक विषयों पर संवाद

asiakhabar.com | February 21, 2026 | 5:59 pm IST

नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित प्रोफेसर मनोज कुमार कैन ने हाल ही में पालम, दिल्ली कैंट स्थित वायु सेना उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य श्री अशोक कुमार और शिक्षकगणों के साथ विभिन्न महत्वपूर्ण शैक्षणिक विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया।
ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य वाले विद्यालय के परिसर में पहुँचने पर प्राचार्य श्री अशोक कुमार ने प्रो. कैन का गर्मजोशी से स्वागत किया। चर्चा के दौरान प्राचार्य ने विद्यालय के गौरवशाली इतिहास को साझा करते हुए बताया कि इस संस्थान की स्थापना आजादी के पांच वर्ष बाद, 1952 में हुई थी। विद्यालय की ऐतिहासिक महत्ता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि 10 फरवरी 1959 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने यहाँ का दौरा किया था। विद्यालय की डायरी में आज भी उनके द्वारा लिखे गए शब्द “प्रसन्न हुआ” और उनके हस्ताक्षर सुरक्षित हैं।प्राकृतिक रूप से संपन्न यह विद्यालय अपने शांत वातावरण और दशकों पुराने विशाल वृक्षों के लिए जाना जाता है, जो विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए एक आदर्श परिवेश प्रदान करते हैं।
शैक्षणिक विमर्श और सर्वांगीण विकास को महत्वपूर्ण मानते हुए
प्रो. मनोज कुमार कैन ने शिक्षकों के साथ संवाद के दौरान नई शिक्षा नीति (NEP) और समकालीन शिक्षा पद्धतियों पर विस्तार से बातचीत की।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जो विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास मे सहायक हो। संवाद सत्र में शिक्षक मनीषा राय, राखी कुमार और हामिदा ने भी सक्रिय रूप से भाग लिया और विद्यालय की हालिया उपलब्धियों व शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में प्रो. कैन को अवगत कराया।
विकसित भारत के संकल्प की चर्चा करते हुए प्राचार्य श्री अशोक कुमार ने विद्यालय के विजन को स्पष्ट करते हुए कहा, “हमारा मुख्य उद्देश्य बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है ताकि यहाँ का प्रत्येक विद्यार्थी एक जिम्मेदार नागरिक बनकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दे सके।” वर्तमान में विद्यालय कला, वाणिज्य और विज्ञान तीनों संकायों में शिक्षा प्रदान कर रहा है।यह भेंट न केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम बनी,बल्कि अकादमिक जगत और स्कूली शिक्षा के बीच समन्वय को भी मजबूती प्रदान की।


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