दिल्ली में एनएसीओ की सुरक्षा संकल्प कार्यशाला आयोजित, एचआईवी/एड्स पर हुई विस्तृत चर्चा

asiakhabar.com | March 20, 2026 | 5:48 pm IST
View Details

नई दिल्ली। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) के माध्यम से शुक्रवार को दिल्ली में सुरक्षा संकल्प कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला एचआईवी/एड्स के प्रति जिला स्तरीय प्रतिक्रिया को मजबूत करने की अपनी गहन और दूरदर्शी रणनीति का हिस्सा है, जिसमें हरियाणा और दिल्ली राज्यों के लिए विशेष भागीदारी पर जोर दिया गया है। इसकी अध्यक्षता एनएसीओ के अतिरिक्त सचिव और महानिदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने की।
इस दौरान डॉ. एसपी भावसार (पीएचएस ग्रुप-I, एनएसीओ) ने भारत में एचआईवी के विकसित होते महामारी विज्ञान संबंधी स्वरूपों की रूपरेखा प्रस्तुत की और मजबूत डेटा विश्लेषण, लक्षित पहुंच और सुदृढ़ सेवा वितरण ढांचे पर आधारित सूक्ष्म, जिला-संचालित रणनीतियों की अनिवार्यता पर जोर दिया।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि एचआईवी/एड्स एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है, जिसके लिए शासन के सभी स्तरों पर निरंतर सतर्कता, नवाचार और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। विश्व स्तर पर स्वीकृत 95:95:95 लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ढांचे का उद्देश्य एचआईवी से पीड़ित 95 प्रतिशत लोगों को अपनी स्थिति के बारे में जानकारी देना, निदान किए गए 95 प्रतिशत लोगों को निरंतर एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) देना और उपचार करा रहे 95 प्रतिशत लोगों में वायरल दमन प्राप्त करना है—जिससे संचरण में काफी कमी आएगी और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार होगा।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में अभी भी गंभीर कमियां हैं, जहां पहचाने गए व्यक्तियों में से केवल लगभग 70 प्रतिशत ही वर्तमान में उपचार प्राप्त कर रहे हैं या उपचार से जुड़े हुए हैं। इससे उपचार कवरेज और उपचार जारी रखने की प्रक्रिया में तेजी लाने की तत्काल आवश्यकता उजागर होती है। इसके विपरीत, हरियाणा ने लगभग 81:83:95 का अनुपात हासिल किया है, जो उत्साहजनक प्रगति को दर्शाता है, साथ ही निदान और उपचार से जुड़ाव को बेहतर बनाने के लिए गहन प्रयासों की आवश्यकता का संकेत भी देता है।
उन्होंने एक महत्वाकांक्षी और समयबद्ध रोडमैप की रूपरेखा भी प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने विश्व एड्स दिवस 2027 तक एचआईवी/एड्स को एक नियंत्रित महामारी घोषित करने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। इस संदर्भ में, उन्होंने आगामी कार्यक्रम चक्र में इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ठोस प्रयास करते हुए, जल्द से जल्द 95:95:99 के उन्नत लक्ष्य की ओर बढ़ने के महत्व पर बल दिया।
सुरक्षा संकल्प कार्यशाला राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर के हितधारकों के बीच सहयोगात्मक योजना के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करती है, जो एचआईवी रोकथाम और परीक्षण सेवाओं के लिए भारत के समन्वित, साक्ष्य-आधारित और डेटा-संचालित दृष्टिकोण को सुदृढ़ करती है। इसका उद्देश्य उपचार से जुड़ाव और उपचार में निरंतरता में सुधार करना, एचआईवी से पीड़ित लोगों में वायरल लोड दमन को बढ़ाना और कमजोर एवं प्रमुख आबादी के बीच लक्षित पहुंच का विस्तार करना है।
यह पहल 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य को प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है, और एचआईवी/एड्स की रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक व्यापक, समावेशी और जन-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित करने के लिए सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाती है, जिससे सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित हो सके।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *