
विनय गुप्ता भारत में प्रामाणिक बयानों का अपने हिसाब से अर्थ निकालना एक परिपाटी-सी बन गई है। विसंगति यह है कि जो प्रचार किया जाता है, उसका मूल बयान से कोई सरोकार ही नहीं होता। एक नई बात गढ़ दी जाती है। इसी को भ्रम ...आगे पढ़ें asiakhabar.com | July 16, 2021 | 5:34 pm IST






