
अर्पित गुप्ता मैं अनंत एकांत में खुद अकेला खेल रहा हूँ। कोई मेरे साथ खेलने वाला नहीं है। शब्दों के कुएँ से शब्द सींच रहा हूँ। इन्हीं शब्दों से कविता की बाल्टी भर रहा हूँ। हर कोई उखड़ा-उखड़ा हुआ है। मेरे अहं ने मुझे अकेला ...आगे पढ़ें asiakhabar.com | March 4, 2021 | 5:42 pm IST





