
अशोक कुमार यादव मुंगेली फटे,पुराने कपड़ों में लिपटी है,गरीबों की गरीबी। भूखा पेट भरता नहीं कभी,ये कैसी है बदनसीबी? रोटी के लिए मजदूर के मन में धधकी ज्वाला। अमीरों की चाबी ने गरीबों के घर लगाई ताला।। झोपड़ी मानो भूत बंगले का कमरा लग रही ...आगे पढ़ें asiakhabar.com | July 15, 2023 | 4:29 pm IST

