
-डा. रवीन्द्र अरजरिया- विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र में अव्यवस्थाओं, मनमानियों और अधिकारों की दुहाई पर सत्ता-सुख की चाहत निरंतर चरम सीमा की ओर बढती जा रही है। सत्ता-सुख की चाहत यानी कि समग्र पर अधिकार दिखाने की इच्छापूर्ति के प्रयास। इन प्रयासों में देश ...आगे पढ़ें asiakhabar.com | April 2, 2023 | 5:53 pm IST


