
अशोक कुमार यादव मुंगेली दौड़ सकता है तो दौड़, भाग सकता है तो भाग। मंजिल पाने के लिए, अंतर्मन में लगी है आग।। ठण्डे खून के उबलने तक या खून सूखने तक। पागलपन की जुनून तक या मुर्दा बनने तक।। जब तक मंजिल ना मिले, ...आगे पढ़ें asiakhabar.com | March 11, 2023 | 10:57 am IST
