
नई दिल्ली: श्रीविजयपुरम देश विदेश में नागरी लिपि का प्रचार प्रसार करने वाली प्रतिनिधि संस्था नागरी लिपि का 49 वां अखिल भारतीय नागरी लिपि सम्मेलन अंडमान निकोबार द्वीपसमूह की राजधानी श्रीविजयपुरम में शुभारंभ हुआ।इसकी अध्यक्षता पूर्व कुलपति एवं नागरी लिपि परिषद के अध्यक्ष ने की । मुख्य अतिथि के रूप में अंडमान निकोबार के उपसचिव राजभाषा श्री राजेन्द्र इंदवार थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में नार्वे के नागरी हिंदी विशेषज्ञ श्री सुरेश चंद्र शुक्ल और जनकपुर धाम, नेपाल के प्राचार्य विद्या वाचस्पति प्रो अजय कुमार झा उपस्थित रहे। सम्मेलन का शुभारंभ अतिथियों द्वारा देवी सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। गुवाहाटी, असम की डॉ नूरजहां रहमतुल्लाह ने दीप प्रज्ज्वलन प्रस्तुत किया। हिंदी साहित्य कला परिषद के प्रधान सचिव श्री ब्रजेश कुमार पांडेय और साहित्य सचिव श्री जगदीश नारायण राय ने परिषद की ओर से शाल और साहित्य प्रदान कर स्वागत किया।
इस अवसर पर नागरी लिपि के महामंत्री एवं नागरी संगम शोध पत्रिका के प्रधान संपादक डॉ हरिसिंह पाल ने बताया कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह में पहली बार नागरी लिपि सम्मेलन और अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह सम्मेलन स्थानीय हिंदी साहित्य कला परिषद, श्रीविजयपुरम और जवाहरलाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन में नार्वे, नेपाल और भारत के असम, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गोवा, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली के नागरी लिपि विशेषज्ञ और अध्येता भाग ले रहे हैं। आभासी माध्यम से देश विदेश के अनेक नागरी लिपि प्रेमी भी जुड़े।
डॉ पाल ने बताया कि इस सम्मेलन में नागरी विमर्श के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा और नागरी लिपि, राष्ट्रीय एकता और नागरी लिपि, सूचना प्रौद्योगिकी और नागरी लिपि, विश्व लिपि के रूप में नागरी और लिपि विहीन भाषाओं के लिए नागरी लिपि विषयों पर विद्वान शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे। सम्मेलन में नागरी लिपि के प्रचार-प्रसार में सराहनीय योगदान के लिए
विनोबा नागरी संस्थागत सम्मान हिंदी साहित्य कला परिषद और व्यक्तिगत विनोबा नागरी सम्मान काटन विश्वविद्यालय, गुवाहाटी, असम की हिंदी प्राध्यापिका डॉ नूरजहां रहमतुल्लाह को प्रदान किया गया। सम्मान में प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह,शाल, अंगवस्त्र और नकद पुरस्कार राशि प्रदान की गई। श्री चवाकुल रामकृष्ण राव, डॉ मुक्ता कौशिक, डॉ अजय कुमार झा ने भी नामित पुरस्कार प्रदान किए।इस अवसर पर अतिथियों द्वारा नागरी संगम, न्यूयॉर्क अमेरिका से प्रकाशित और डॉ हरिसिंह पाल द्वारा संपादित सौरभ पत्रिका और डॉ राजलक्ष्मी कृष्णन, डॉ पोपट राव कोटमे, डॉ गणेश पोद्दार और डॉ शैलेंद्र कुमार शर्मा की संपादित पत्रिकाओं का लोकार्पण किया गया। द्वितीय सत्र में राष्ट्रीय एकता में नागरी लिपि की भूमिका विषय पर डॉ शैलेंद्र कुमार शर्मा की अध्यक्षता और आचार्य ओमप्रकाश के संचालन में विशाखापत्तनम की डॉ विजया भारती जेल्दी, जवाहर लाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय श्रीविजयपुरम की डॉ नेहा सिंह और श्री मोहन द्विवेदी, तृतीय सत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा में नागरी लिपि विषय पर चेन्नई की डॉ राजलक्ष्मी कृष्णन की अध्यक्षता और नूरजहां रहमतुल्लाह के कुशल संचालन में नेपाल के डॉ अजय कुमार झा, झारखंड के डॉ अशोक अभिषेक, जवाहर लाल नेहरू राजकीय महाविद्यालय की डॉ सुमन बारला और दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थी श्री शिवनारायण ने अपने अपने शोध पत्रों का वाचन किया।इस अवसर पर अंडमान निकोबार द्वीपसमूह विभिन्न विभागों और शिक्षा संस्थानों के अधिकारी, प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस सम्मेलन में आभासी माध्यम से अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन,जर्मनी,स्पेन,मारीशस, नीदरलेंड, सूरीनाम, फिजी , संयुक्त अरब अमीरात, बल्गारिया और नेपाल सहित अनेक देशों के और भारत के विभिन्न अंचलों के नागरी लिपि प्रेमियों के शुभकामना संदेश प्राप्त हुए ।
