
सीमा त्यागी
नई दिल्ली। अगर वास्तव में 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री जी के सपने को साकार कर भारत में 100 % साक्षरता के लक्ष्य को हासिल करना है तो सरकार को भारत की शिक्षा व्यवस्था को सस्ती ,सुलभ और मजबूत कर आरटीई अधिनियम को देश में प्रभावी रूप से लागू करना होगा अगर हम आंकलन करे तो आज की परिस्थितियों में देश में आरटीई अधिनियम 2009 के तहत, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चो को निजी स्कूलों में 25 % कोटे के तहत निःशुल्क शिक्षा का अधिकार केवल कक्षा आठ तक ही सीमित है इसलिए कक्षा आठ के बाद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को अक्सर पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है क्योंकि उनके अभिभावक निजी स्कूलों में अपने बच्चो की आगे की पढ़ाई का खर्च वहन नहीं कर पाते जो केंद्र और राज्य सरकारों के लिए चिंता का विषय होना चाहिए हम सभी जानते है कि भारत के संविधान का अनुच्छेद 21अ, 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करता है, जिसे प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 लाया गया था। जिसके तहत देश के लाखो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को स्कूल जाने का अवसर मिला इन लाखों बच्चों को कक्षा 12 तक निःशुल्क शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए अब समय आ गया है कि आरटीई के नियमों में संशोधन करते हुए कक्षा आठ से शिक्षा के दायरे को बढ़ाकर कक्षा बारह तक निःशुल्क किया जाए, जिससे देश के लाखो बच्चो को उच्च माध्यमिक शिक्षा का लाभ भी मिल सके।वर्तमान में राजस्थान सरकार ने आरटीई के तहत बच्चो की शिक्षा कक्षा आठ से बढ़ाकर कक्षा बारह तक करने का निर्णय लिया है जो एक सार्थक पहल है इसी पहल को आगे बढ़ाते हुए अगर केंद्र सरकार के साथ सभी राज्य सरकारें समन्वय स्थापित करे तो देश के सभी राज्यों में आरटीई के तहत बच्चो की शिक्षा कक्षा आठ से बढ़ाकर कक्षा बारह तक की जा सकती है जो देश के गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के बच्चो को कक्षा 12 तक शिक्षा दिलाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है साथ ही सभी राज्यों में आरटीई अधिनियम को प्रभावी रूप से लागू किया जाए जिससे कि निजी स्कूलों की मनमानी के कारण आरटीई के तहत एक भी बच्चा शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित ना रह सके
