
नई दिल्ली। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सांसद डॉ. शशि थरूर द्वारा लिखित पुस्तक ‘द सेज हू रीइमैजिन्ड हिंदूइज्म: द लाइफ, लेसन्स एंड लेगेसी ऑफ श्री नारायण गुरु, का विमोचन किया।
सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्री नारायण गुरु, ऐसे वक्त में आध्यात्मिक गुरु के रूप में उभरे, जब समाज में जातिगत विभाजन और सामाजिक भेदभाव गहराई से जड़े जमा चुके थे। उन्होंने कहा कि गुरु जी का अमर संदेश, “मानव जाति के लिए एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर,” न केवल एक आध्यात्मिक उद्घोषणा थी, बल्कि समानता, गरिमा और सार्वभौमिक बंधुत्व के लिए एक क्रांतिकारी आह्वान भी था।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि श्री नारायण गुरु ने समावेशी मंदिर की स्थापना और शिक्षा को बढ़ावा देने जैसी पहलों के जरिए ज्ञान और करुणा से अन्याय को चुनौती दी। पिछले वर्ष दिसंबर में शिवगिरि मठ की अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने शिवगिरि को सबसे पवित्र स्थानों में से एक बताया, जो सभी को समानता और सम्मान के साथ व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह पुस्तक श्री नारायण गुरु के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डालती है, जिन्होंने आत्मसम्मान, ईमानदारी से श्रम और सामाजिक परिवर्तन पर बल देकर वंचित समुदायों को सशक्त बनाया। उन्होंने 1903 में स्थापित श्री नारायण धर्म परिपालन (एसएनडीपी) योगम का भी उल्लेख किया, जिसने शिक्षा, संस्था निर्माण और सामाजिक-आर्थिक उत्थान के जरिए गुरु जी के मिशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
सभी से समानता, एकता और शिक्षा के आदर्शों के प्रति स्वयं को फिर से समर्पित करने का आह्वान करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि एसएनडीपी आंदोलन द्वारा सुदृढ़ किए गए और इस पुस्तक जैसे विद्वतापूर्ण कार्यों के जरिए व्यक्त किया गया श्री नारायण गुरु का दृष्टिकोण, न्याय, सद्भाव और मानवीय गरिमा पर आधारित समाज के निर्माण के लिए राष्ट्र को प्रेरित करती रहेगा।
