
नई दिल्ली: पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले एक्टिविस्ट के एक समूह ने सभी राज्य सरकारों से अपील की है कि आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए वे मैन्स बेस्ट फ्रेंड (एमबीएफ) मॉडल अपनाएं। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एनिमल एक्टिविस्ट संक्षय बब्बर ने बताया कि एमबीएफ एक राष्ट्रीय सार्वजनिक सुरक्षा एवं प्रशासनिक मिशन है, जिसका उद्देश्य भारत में मेंस–डॉग संघर्ष का स्थायी समाधान प्रस्तुत करना है। उन्होंने कहा कि यह पहल 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की विनियमित कैनाइन अर्थव्यवस्था को विकसित करने और लाखों रोजगार सृजित करने की क्षमता रखती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपस्थित एनिमल एक्टिविस्ट्स ने कहा कि एमबीएफ आवारा पशुओं को समस्या के रूप में नहीं, बल्कि प्रशासनिक और आर्थिक अवसर के रूप में देखता है। यह मॉडल पहचान प्रणाली, 80% से अधिक टीकाकरण कवरेज, नसबंदी ट्रैकिंग, व्यवहार मॉनिटरिंग और सामुदायिक कुत्तों की संरचित तैनाती को एक एकीकृत जवाबदेह प्रणाली में जोड़ता है।
उन्होंने बताया कि एमबीएफ के तहत मौजूदा एनिमल पाउंड्स को सरकारी पशु अस्पतालों और ट्रॉमा यूनिट्स में परिवर्तित किया जाएगा—जिससे नसबंदी क्षमता बढ़ेगी, पशु चिकित्सकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और राज्यों के लिए सतत राजस्व सृजित होगा। एक केंद्रीकृत मोबाइल ऐप के माध्यम से नगर निगम और फीडर्स मिलकर नसबंदी, फीडिंग ज़ोन, स्वास्थ्य जांच, व्यवहार रिपोर्ट, जियोटैग्ड डाटाबेस, माइक्रोचिपिंग और गोद लेने के अभियानों को ट्रैक कर सकेंगे।
इस ढांचे के अंतर्गत मान्यता प्राप्त निजी चिकित्सा केंद्रों को नसबंदी सेवाओं में शामिल किया जाएगा, सोसायटी के कुत्तों को सुरक्षा सहयोगी के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, अस्पतालों में थेरेपी डॉग्स की तैनाती होगी, सड़कों पर दुर्घटनाओं को कम करने के लिए कुत्तों और मवेशियों पर रिफ्लेक्टिव कॉलर लगाए जाएंगे, तथा इंडी डॉग गोद लेने को प्रोत्साहन दिया जाएगा और विदेशी नस्लों पर स्ट्रक्चर्ड टैक्स व्यवस्था लागू की जाएगी।
आवारा पशुओं हटाने पर आधारित नीतियों से हटकर, एमबीएफ नियंत्रित सह-अस्तित्व की दिशा में काम करेगा—काटने की घटनाओं को कम करने, रेबीज़ के खतरे को समाप्त करने, नागरिक व्यवस्था बहाल करने और एक आत्मनिर्भर, मानवीय प्रशासनिक प्रणाली स्थापित करने के लिए।
आखिर में संक्षय बब्बर ने कहा, “हमारा देश सदैव पशु-प्रेमी राष्ट्र रहा है—हमारे देवताओं के अर्ध-पशु स्वरूप और पशुओं की पूजा इसकी जड़ें दर्शाती हैं। हम एमबीएफ के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए, अपने पूर्वजों के मार्ग पर चलकर मानव और पशु संबंधों को बेहतर बनाने का संकल्प लेते हैं।”
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के सफल आयोजन में प्राणा फाउंडेशन (बेंगलुरु), फ्रेंड्स फॉर एनिमल्स ट्रस्ट (बेंगलुरु), साउथ बेंगलुरु केयर्स, डॉग्स प्रोटेक्शन ट्रस्ट मैसूर, पीपल फॉर कैटल इन इंडिया (चेन्नई) – श्री अरुण प्रसन्ना जी, जीव आश्रय सेवा संस्था (लखनऊ), अहिंसा फार्म एनिमल सैंक्चुअरी (केरल), दुलार अमानत फाउंडेशन (दिल्ली एनसीआर), लूसी फाउंडेशन (असम) तथा एंजेलिक एनजीओ (हैदराबाद) का सहयोग सराहनीय रहा। इन सभी संस्थाओं एवं उनसे जुड़े सभी सदस्यों के प्रति हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।
