
नई दिल्ली/बेंगलुरु , देश- विदेश में नागरी लिपि का प्रचार- प्रसार करने वाली प्रतिनिधि संस्था नागरी लिपि परिषद की कर्नाटक इकाई द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर ‘ अंतरराष्ट्रीय नागरी लिपि विमर्श एवं सम्मान समारोह ‘ का भव्य आभासी आयोजन किया गया है।इसकी अध्यक्षता नागरी लिपि परिषद के महामंत्री और न्यूयॉर्क अमेरिका से प्रकाशित वैश्विक हिंदी पत्रिका सौरभ के संपादक डॉ हरिसिंह पाल ने की। बेंगलुरु के पूर्व प्राचार्य डॉ इसपाक अली मुख्य अतिथि के रूप में और साझा संसार के अध्यक्ष एवं नागरी लिपि परिषद की नीदरलैंड्स के प्रभारी डॉ रामा तक्षक और परिषद की मारीशस इकाई के प्रभारी डॉ सोमदत्त काशीनाथ वक्ता तथा जैन विश्वविद्यालय की पूर्व संकायाध्यक्ष डॉ मैथिली पी राव विशिष्ट अतिथि के रूप उपस्थित रहे।
अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ हरिसिंह पाल ने कहा कि अब नागरी लिपि में लिखी जा रही हिंदी की लोकप्रियता दिनों दिन बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर भी इसका प्रयोग बढ़ रहा है। प्रवासी भारतीय और भारतवंशी अनेक विधाओं में रचना कर इसे और समृद्ध कर रहे हैं। डॉ तक्षक ने नागरी लिपि के दार्शनिक पक्ष, डॉ सोमदत्त ने मारीशस में नागरी हिंदी स्थिति, डॉ इसपाक अली ने नागरी लिपि के महत्व और डॉ मैथिली राव ने कर्नाटक में हिंदी भाषा की स्थिति पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर नीदरलैंड्स के डॉ राम तक्षक, मारीशस के डॉ सोमदत्त काशीनाथ ,केरल के डॉ संजय एस मदार, औरंगाबाद के डॉ बलीराम थापसे , धारवाड़ के डॉ राजकुमार एस नायक, बेंगलुरु के डॉ एस ए मंजूनाथ, छत्रपति संभाजी की डॉ देवयानी बालाजी नवले, छत्तीसगढ़ के डॉ अनिल कुमार प्रधान, गुजरात के डॉ गुलाब पटेल, जम्मू के श्री पवन वर्मा, उज्जैन के ओमप्रकाश जोशी गंभीरा, डॉ जयसंजय रामटेके, कल्पना कुलश्रेष्ठ सहित कुछ और हिंदी सेवियों को ‘ अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य रत्न सम्मान -2025 ‘ प्रदान किए गए। स्वागत भाषण और धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ मलकप्पा अलियास महेश और संचालन श्रीमती अनीता तोमर ने किया।इस अवसर पर देश के विभिन्न अंचलों के नागरी लिपि प्रेमी उपस्थित रहे।
