
गाजियाबाद: गाजियाबाद नाम आतताई के नाम को महिमामंडित करता नाम उसके आतंक से पीड़ित पूर्वजों का सामूहिक अपमान है
इस गाजियाबाद के नाम परिवर्तन अभियान में मंजिल तक पहुचने में आप सम्मानित महानुभाव का सहयोग परम आवश्यक है
आप व्यक्तिगत व संगठन स्तर से जो सहयोग समर्थन कर रहे हैं व अभियान को गति देने के लिए जो सहयोग समर्थन आशीर्वाद प्रदान किए हैं उसके लिए आपका सादर नमन वंदन अभिनंदन
जिले के आध्यात्मिक क्षेत्र के प्रमुख पूज्य संतजन सर्वश्री महंत नारायण गिरी जी श्री गुरू पवन सिन्हा जी व श्री नवनीत प्रिय दास जी महाराज आचार्य ब्रजेश गौड जी ने अभियान को अपना आशीर्वाद प्रदान किया है
जिले शहर व आसपास के सम्मानित प्रबुद्ध जन ने अपने हर सम्भव प्रयास से
अभी तक जो कार्य किये/ हुए हैं उनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है
जिले भर में 26 स्थानों पर प्रत्येक में 5000 की संख्या के साथ मानव श्रृंखला बनाने की घोषणा की गई जिसमें 5 स्थानों पर सफलतापूर्वक यह कार्यक्रम किया गया और प्रबुद्ध जनों व सामाजिक राजनीतिक नेतृत्व के आग्रह पर इसको कुछ समय के लिए विश्राम दिया गया है
टोल फ्री नम्बर पर मिस्ड कॉल कर भारी समर्थन संख्या लगभग सवा लाख होने की सहयोगी साथी संगठनों को बधाई दी गई
नगर निगम में बोर्ड बैठक में महापौर श्रीमती सुनीता दयाल जी द्वारा सदन के पटल पर नाम परिवर्तन संबंधी विषयक प्रस्ताव रखा जिसे नगर निगम बोर्ड के 100 सदस्यीय पक्ष विपक्ष के पार्षद गण ने सर्वसम्मति से पारित किया
नामित पार्षदों ने समर्थन पत्र जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को सौंपा
स्थानीय संसद सदस्य लोकसभा तत्कालीन केन्द्रीय मंत्री माननीय वीके सिंह जी वर्तमान महामहिम राज्यपाल मिजोरम ने समर्थन दिया
जिले के सभी 5 माननीय विधायकों सहित वर्तमान माननीय सांसद श्रीमान अतुल गर्ग जी/तत्कालीन विधायक ने नाम परिवर्तन अभियान का समर्थन करते हुए अपनी लिखित सहमति पत्र माननीय मुख्यमंत्री जी को सौंपा
तत्कालीन राज्यसभा सांसद श्री अनिल अग्रवाल जी ने समर्थन दिया
विधानसभा सत्र में माननीय विधायक श्री सुनील शर्मा जी वर्तमान कैबिनेट मंत्री जी ने गजप्रस्थ के रूप में पूर्व नाम वापस दिलाने का प्रस्ताव यह कहते हुए दिया कि पूरा शहर मांग रहा है महाभारत कालीन नाम गजप्रस्थ है जिसे विधानसभा में ध्वनि मत मिला
जिलाधिकारी महोदय के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी को विभिन्न प्रमुख सक्रिय सामाजिक व्यापारिक नागरिक संगठनों ने अपने समर्थन पत्र प्रशासन के माध्यम से भेजे हैं जिनकी संख्या लगभग 152 है
इन संगठन मे कुछ संगठन एक लाख से अधिक की सदस्य संख्या के हैं
इन सभी संगठनों द्वारा अपने निवास स्थान व्यवसायिक औद्योगिक प्रतिष्ठान पर गाजी मुक्त गजप्रस्थ लिखे ऐसा निवेदन किया गया और कई व्यापार मंडल द्वारा अपने-अपने सदस्य व्यापारियों के प्रतिष्ठानों पर गजप्रस्थ के स्टीकर लगाये गए हैं
जिले भर में 100 हवन की एक श्रंखला चलाई गई जिसमें अलग-अलग समय पर अलग-अलग स्थानों पर विभिन्न संगठनों के सहयोग द्वारा इस कार्य को पूर्ण किया गया
चौ चरण सिंह विश्वविद्यालय इतिहास विभागाध्यक्ष इतिहासकार ने लिखित रूप मे वर्तमान गाजियाबाद के पूर्व नाम गजप्रस्थ होने के साक्ष्य महाभारत ग्रंथ से उपलब्ध कराये हैं
पिछले सात वर्ष मे केन्द्रीय व राज्य सरकार के मंत्रिमंडल के जिन माननीय का दौरा जिले मे हुआ उन समस्त माननीय जन को श्रीमद्भगवत गीता भेंटकर स्वागत अभिनंदन करते हुए नाम परिवर्तन संबंधित ज्ञापन सौंपा गया
छोटी छोटी गोष्ठी व निवेदन सभा जनसमर्थन हेतु निवेदन अनवरत मंजिल मिलने तक जारी रहेगा
उपरोक्त सभी कार्य जन सामान्य के समक्ष समाचार पत्रों के माध्यम से व सोशल मीडिया पर #गाजी-शब्द को देश निकाला हो अभियानव#अत्याचारियो_को_सम्मानित_करती_मानसिकता_भारत_छोडो_अभियान के अंतर्गत रसम के पेज पर उपलब्ध हैं
