दिल्ली लाइब्रेरी एसोसिएशन ने किया श्री एन.के. गोयल स्मृति व्याख्यान ” राष्ट्र निर्माण में पुस्तकालयों की भूमिका” का आयोजन

asiakhabar.com | September 30, 2025 | 5:37 pm IST

नई दिल्ली।आज दिल्ली ग्रंथालय संघ के नारायणा विहार स्थित मुख्यालय के सभागार में दिल्ली ग्रंथालय संघ को मूर्त रूप देने वाले श्री एन.के. गोयल जी की स्मृति में “राष्ट्र निर्माण में पुस्तकालयों की भूमिका” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
दीप प्रज्वलन के साथ आरंभ हुए कार्यक्रम में दिल्ली ग्रंथालय संघ के अध्यक्ष प्रो के.पी. सिंह ने सभी आगंतुक अतिथियों का अभिनंदन अंग वस्त्रम,पुष्प गुच्छ एवं श्रीमद् भागवत गीता की प्रति भेंट करके किया। श्री एन.के. गोयल की सुपुत्री डॉ. सरोजिनी सिंघल ने अपने पिता जी की दिल्ली ग्रंथालय संघ के भूमि पूजन से भव्य भवन तक की यात्रा का भावपूर्ण विश्लेषण किया। उन्होंने अपने बाल्यकाल की स्मृतियों को टटोलते हुए पिताजी के जीवन को याद किया। वह दिल्ली पुस्तकालय संघ को और आगे बढ़ाने हेतु सदैव प्रयासरत रहे।
मुख्य वक्ता, जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज की प्राचार्या प्रो. स्वाति पाल ने, “राष्ट्र निर्माण में पुस्तकालयों की भूमिका” पर अपने व्याख्यान में भारत में पहले पुस्तकालय की स्थापना के समय 21 मार्च 1836 से वर्तमान तक के स्थापित पुस्तकालयों की उपयोगिता की चर्चा की। उन्होंने स्वामी विवेकानंद, बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी आदि के पुस्तकालयों से संबंधित महत्वपूर्ण वाक्य उद्धृत किए । जिनमें पुस्तकालय से व्यक्ति निर्माण एवं व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण की यात्रा का चिंतन है। उन्होंने वर्तमान समय में पुस्तकालयों को और सुलभ, तकनीकी बद्ध एवं नवाचार के प्रयोग का माध्यम बनाने पर बल दिया। उन्होंने सभी का आह्वान किया कि जानकी देवी मेमोरियल महाविद्यालय में उन्होंने सभी के सहयोग से पुस्तकालय में नवाचार प्रयोगों को स्थापित किया है ।एक मॉडल के रूप में सभी देखने आएं।
कार्य
मुख्य अतिथि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र कला निधि विभाग के निदेशक एवं डीन प्रशासन प्रो. रमेश चंद्र गौर ने अपना व्याख्यान ,भारत के इतिहास में विश्व का सबसे बड़ा पुस्तकालय, नालंदा की संरचना से आरंभ किया। उन्होंने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा श्रुति से स्मृति और स्मृति से पांडुलिपि तक की यात्रा करते हुए पुस्तकालयों तक पहुंची है। आज पुस्तकालयों को तकनीकि के साथ अपग्रेड करना होगा। हर बड़े पुस्तकालय में सामान्य व्यक्ति की पहुंच हो ऐसा वातावरण तैयार करना होगा। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सकारात्मक प्रयोग का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि यदि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से साहित्य समीक्षा में यदि सरलता मिलती है तो यह तो अच्छा ही है। उन्होंने पुस्तकालयों को और सुदृढ़ बनाने ई लाइब्रेरी को और मजबूत करने और पुस्तकालयों में पुस्तकें खोजना और सरल बनाने के लिए तकनीकी प्रयोग और पुस्तकालय कर्मियों के प्रशिक्षण पर भी बल दिया। उन्होंने दिल्ली ग्रंथाकार संघ को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए अपना सहयोग देने का भी आश्वासन दिया। श्री एन के गोयल जी की एक और सुपुत्री डॉ. नीरजा वार्ष्णेय ने भी अपने पिता जी को याद किया। श्री गोयल जी के शिष्यों में श्री एस.एस. खन्ना सहित अन्य महानुभावों ने गोयल जी के समय के अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा किए।
अंत में दिल्ली ग्रंथालय संघ के महासचिव डॉ. जनेंद्र नारायण सिंह ने सभी आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन, श्री मती निवेदिता जी ने किया।


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