
नई दिल्ली: देश में मानवाधिकारों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कॉउंसिल (IHRC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि मानवाधिकार केवल कानून की पुस्तकों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन में उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित होना चाहिए।
शर्मा ने अपने हालिया बयान में स्पष्ट किया कि मानवाधिकारों की वास्तविक रक्षा तभी संभव है जब समाज के सभी वर्ग सक्रिय रूप से भागीदारी करें। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी अनिवार्य है और यह केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है।
युवाओं की भूमिका पर विशेष बल देते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को जागरूक करना दीर्घकालिक समाधान की कुंजी है। शिक्षा संस्थानों, सामाजिक संगठनों और जनजागरण अभियानों के माध्यम से अधिकारों एवं कर्तव्यों की समझ विकसित की जानी चाहिए।
शर्मा ने पारदर्शिता और जवाबदेही को लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बताते हुए कहा कि स्वतंत्र निगरानी तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है, ताकि मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जा सके।
अंत में उन्होंने सरकार, प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों से संयुक्त रूप से कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि मानव गरिमा, समानता और न्याय के मूल सिद्धांतों को सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है।
