
कस्तूरी दिनेश
मेरा नगर एक तरह से राष्ट्रीय-अन्तराष्ट्रीय राजनीति का साक्षात जीवंत नमूना है ! यहाँ राजनीति के हर प्रसिद्ध चेहरे का “सेम्पल” मिल जायेगा,जिनके बारे में आप अखबारों और टी.वी.में रोज पढ़ते-सुनते होंगे.पत्रकार होने के कारण इस शहर के प्राय: हरेक राजनीतिज्ञ बन्धु से मेरे मधुर सम्बन्ध हैं |आज सुबह की ही बात है,हमारी प्रात:भ्रमण-मंडली में गोवर्धन भाई आ मिले | वे नगर निगम में अपने मोहल्ले के पार्षद हैं | नमस्कार-चमत्कार के बाद बात शहर की सफाई व्यवस्था पर आकर ठहर गई | पत्रकार नकुल दुबे ने शिकायत करते हुए कहा—“पूरे नगर की सफाई के लिए ठेकेदार को पच्चीस लाख का ठेका मिला हुआ है पर न सड़कों की ठीक से सफाई होती है न नालियों की | मेरे मोहल्ले में तो नालियां सड़कों पर गंगा-यमुना की तरह हिलोरें मार रहीं हैं | रात तो रात दिन को भी मच्छर-सुंदरियां नृत्य करती हुई गालों और माथे का मधुर चुम्बन लेकर दिन दहाड़े रोमांस प्रगट करती हैं !”कपड़ों की रेडीमेड दुकानवाले नानूमल कहाँ चूकने वाले थे | वे बोले—“सब चोर है साले…!जनता के पैसों की चोरी…! बहराम चोट्टे…! निगम के अध्यक्ष चोर,प्रशासक चोर…! अध्यक्ष और प्रशासक से मिली भगत है,बेदर्दी से गुलछर्रे उड़ाये जा रहे हैं…!” हरि वर्मा हाई स्कूल में टीचर हैं | वे गोवर्धन भाई से शिकायती स्वर में बोले—“आप पार्षद लोग कुछ बोलते-टोकते क्यों नहीं गोनू भाई ! आँखों में देखकर मक्खी निगल रहे हैं…!” उनकी बात सुनकर गोवर्धन भाई की त्योरियां थोड़ी चढ़ गईं. वे तुर्श स्वर में बोले—“मैं अकेले क्या कर सकता हूँ….| बाक़ी पार्षदों के रिश्तेदारों को तो शहर में छोटे-बड़े ठेके देकर अध्यक्ष ने मिला रखा है. लगा हूँ जुगाड़ में,कुछ प्रूफ-श्रूफ़,कच्चा-चिट्ठा हाथ लगे तो देख लेना, एक दिन निगम की जनरल मीटिंग में बम फोडूंगा… ! ऐसा–वैसा नहीं पूरा हाईड्रोजन बम…!”
महात्मा गांधी वार्ड के ढेलूराम प्रजापति चायपत्तीवाले भी साथ थे ! मैंने टोह लेते हुए पूछा—“आपके यहाँ के पार्षद का क्या हालचाल है…?” वे त्योरियां चढ़ाते हुए बोले—“बाहरी है गधे की औलाद …! हमारे मोहल्ले का है ही नहीं …! मोहल्ले में बहुत सारे घुसपैठिये हैं, बाहरी प्रांत से आकर बसे हुए | बस उन्हीं के सहारे जीतकर पार्षद बन गया है | निगम की नाली-सडक का ठेका अपने रिश्तेदारों को दिलाकर मोटा माल छाप रहा है उसे यहाँ की समस्याओं से क्या लेना देना…? किराना दूकान वाले मन्नू अग्रवाल बहुत देर से मुंह बांधे चुप चल रहे थे | अचानक वे गुर्राए—पिछली बार निगम में जब हमारी पार्टी की सरकार थी तब बेईमान भ्रष्टाचार-भ्रष्टाचार की खूब हांक लगाते थे | अब देख लो इन लुटिया चोरों को …! शहर का क्या हाल कर रखा है…? आये दिन साला कोई न कोई स्केम…!एक महीना पहले हमारे व्यापारी संघ वाले अपनी समस्याओं को लेकर प्रशासक से मिले तो बात ही बात में थोड़ी गर्मा-गर्मी हो गई …! घोंचू ने गुस्से में आकर दुकानों का टैक्स बढ़ाकर डेवढ़ा कर दिया…! प्रशासक क्या है, साला पूरा ट्रम्प है…! लो अब मरो…! उनके हाथ में कलम की ताकत है,उनसे कुश्ती थोड़ी लड़ोगे …?” शहर की समस्याओं को लेकर भ्रमण-मंडली की इन रोचक बातों में प्रात:-भ्रमण कब पूरा हुआ और कब मेरा घर आ गया मुझे पता ही नहीं चला ! मैंने मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर उनसे विदा ली और अपने घर में प्रविष्ट हो गया | अब आप अनुमान लगाइए कि हमारे शहर की राजनीति में इस समय कौन-कौन से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नेताओं के जुड़वें हैं…?
