
राजेश कुमार पासी
अभी तक अमेरिका दुनिया का अकेला सुपर पावर देश माना जाता है, बेशक उसे अब कई देशों से चुनौती मिलने लगी है। यूपीए सरकार के दौरान देश के गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम ने बयान दिया है कि वो पाकिस्तान से मुंबई हमले का बदला लेना चाहते थे लेकिन उन्हें सरकार ने अमेरिकी दबाव के कारण इसकी अनुमति नहीं दी । उनकी यह बात सही हो सकती है क्योंकि अमेरिका कभी भी पाकिस्तान का नुकसान नहीं चाहता। पाकिस्तान अमेरिका के लिए एक किराये का गुंडा है जिसका वो कभी भी इस्तेमाल कर सकता है। अमेरिका को पता था कि अगर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई कार्यवाही की तो दोनों देश युद्ध में जा सकते हैं जिससे पाकिस्तान की बर्बादी हो सकती है। इसी तरह इजराइल भी अमेरिका का गोद लिया हुआ एक बच्चा है जो अब इतना ताकतवर हो गया है कि पूरे मध्य एशिया को उसके लिए नियंत्रित करता है।
7 अक्टूबर, 2023 को हमास ने इजराइल पर बड़ा आतंकवादी हमला किया था जिसमें 1200 इजराइलियों की हत्या कर दी गई और लगभग 200 लोगों का अपहरण कर लिया गया । इस हमले में बूढ़े, बच्चे और महिलाओं के साथ कोई रियायत नहीं बरती गई और महिलाओं के साथ दरिंदगी भी की गई । इस हमले के बाद इजराइल ने गाजा पर सैन्य हमला शुरू कर दिया और वो आज भी जारी है । लगभग 60000 लोग इजराइल के हमले में मारे जा चुके हैं और लाखों लोग घायल हो चुके हैं । इन हमलों में इजराइल लगातार गाजा पर हवाई हमले कर रहा है जिसके कारण तीन-चौथाई से ज्यादा इमारतें नष्ट हो चुकी हैं । कहा जा रहा है कि इजराइल के सैन्य अभियानों के इतिहास में यह सबसे विनाशकारी अभियान है ।
इजराइल के हमलों के कारण पूरे मध्य एशिया में तनाव फैल गया है । इजराइल के हमलों में बच्चे और महिलाएं भी निशाना बन रहे हैं । इसके कारण पूरी दुनिया में इजराइल की बदनामी हो रही है । उसके खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में भी प्रस्ताव पास हो चुका है लेकिन इजराइल रूकने का नाम नहीं ले रहा है । इजराइली हमलों के कारण अमेरिका पर भी भारी दबाव है कि वो इजराइल की मदद कर रहा है । मुस्लिम देश अमेरिका से नाराज हैं कि वो इजराइल के हमलों को क्यों नहीं रोक रहा है ।
हमास के बड़े नेता कतर की राजधानी दोहा के एक भवन में सीजफायर को लेकर चर्चा कर रहे थे । उसी समय इजराइल की वायुसेना ने लाल सागर से बैलिस्टिक मिसाइल से उस भवन को उड़ा दिया । इस हमले में हमास के 5 अधिकारी और कतर सेना का एक सैनिक मारा गया । इसके कारण न केवल कतर बल्कि पूरे अरब जगत में अमेरिका के खिलाफ गुस्सा फैल गया क्योंकि अमेरिका ही इन देशों का सुरक्षा प्रदाता है । गाजा में इजराइल के हमलों के कारण पहले ही मुस्लिम जगत अमेरिका से नाराज है. दोहा के हमले के बाद अरब देशों में अमेरिका के प्रति गहरी नराजगी उत्पन्न हो गई है । डोनाल्ड ट्रंप ने इस समस्या की गंभीरता को समझ लिया है, इसलिए उन्होंने इससे बाहर निकलने का रास्ता निकालने की कोशिश शुरू कर दी है । इस कोशिश के अंतर्गत ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू डोनाल्ड ट्रंप से मिलने अमेरिका गए थे । वार्ता के दौरान ट्रंप ने कतर के पीएम अल थानी को फोन किया और नेतन्याहू भी लाइन पर आ गए । नेतन्याहू ने कतर पर हमले के लिए थानी से माफी मांगी और कहा कि हमने गलती की है लेकिन अब भविष्य में ऐसी गलती कभी नहीं होगी। इस माफी के बाद ट्रंप ने दुनिया के सामने अपना 20 सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश कर दिया ।
इजराइल द्वारा माफी मांगने से पूरे इस्लामी जगत में खुशी की लहर है, इसलिए जल्दबाजी में मुस्लिम देशों ने शांति प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है और इजराइल ने भी इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है । भारत और पश्चिमी देशों द्वारा भी इस प्रस्ताव का स्वागत किया जा रहा है । इसके अलावा आठ अरब देशों, चीन, रूस और पाकिस्तान ने भी इस पहल को अपना समर्थन दे दिया है । देखा जाए तो लगभग सभी देश इस प्रस्ताव के समर्थन में आ गए हैं । हमास ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है । हमास का कहना है कि वो प्रस्ताव की शर्तों का गहन अध्ययन करने के बाद ही अपना रुख स्पष्ट करेगा । जब तक हमास का रवैया स्पष्ट नहीं होता है, तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि इस समस्या का समाधान हो गया है.
अगर ट्रंप के 20 सूत्रीय कार्यक्रम की बात करें तो ऐसा लगता है कि ट्रंप ने बहुत सोच समझ कर यह प्रस्ताव पेश किया है । प्रस्ताव के अनुसार यदि दोनों पक्ष इसे स्वीकार कर लेते हैं तो युद्ध तुरंत समाप्त हो जाना चाहिए । समझौता होने के बाद 72 घंटों के भीतर दोनों पक्षों को बंधकों और कैदियों को रिहा करना होगा और शवों को भी एक दूसरे को सौंपना होगा । गाजा का प्रशासन एक तकनीकी और गैर-राजनीतिक फिलिस्तीनी समिति को सौंपा जाएगा जिसकी निगरानी डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाला ‘बोर्ड ऑफ पीस’ करेगा जिसमें एक सदस्य ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी होंगे । हमास और इजराइल की इसमें कोई भागीदारी नहीं होगी । गाजा की सुरक्षा के लिए अस्थायी अंतरराष्ट्रीय बल का गठन किया जाएगा । इजराइल धीरे-धीरे अपनी सेना गाजा से हटा लेगा लेकिन जब तक गाजा की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक इजराइल को कुछ जिम्मेदारियां निभानी होंगी । ट्रंप ने कहा है कि यदि हमास प्रस्तावित शांति समझौते को स्वीकार नहीं करता है तो उसे हराने के लिए इजराइल को अमेरिका का पूर्ण समर्थन प्राप्त होगा । यही बात नेतन्याहू ने कही है कि अगर हमास इस प्रस्ताव को नहीं मानता है तो इजराइल अपने तरीके से गाजा को हमास से मुक्त करवाएगा ।
सवाल यह है कि क्या अमेरिका ने हमास के लिए कोई विकल्प भी छोड़ा है । अगर इस प्रस्ताव की शर्तों का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया जाए तो पता चलता है कि हमास के लिए प्रस्ताव को मानना या न मानना दोनों ही घातक हैं । अगर वो ट्रंप के प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है तो वो खत्म हो जाएगा और अगर नहीं करता है तो भी वो खत्म हो जाएगा । ट्रंप द्वारा दिया गया प्रस्ताव पूरी तरह से इजराइल के पक्ष में झुका हुआ दिखाई देता है । प्रस्ताव की शर्तों को पढ़ा जाए तो पता चलता है कि इसमें वही बातें हैं जिनके लिए इजराइल हमास पर हमले कर रहा है । ईरान इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है, यह भी देखने वाली बात होगी क्योंकि हमास ईरान की मदद से ही चल रहा है । अमेरिका को लगता है कि यह मामला राजनीतिक है जबकि सच यह है कि यह मामला धार्मिक है । ऐसा नहीं लगता है कि हमास इस प्रस्ताव को स्वीकार करने वाला है । हमास ने गाजा पर हमले के बाद बड़ी कीमत चुकाई है लेकिन उसने गाजा नहीं छोड़ा है । अब वो बिना लड़े कैसे गाजा से निकल जाएगा ।
वास्तव में ट्रंप ने मुस्लिम देशों को शांत कराने के लिए यह प्रस्ताव पेश किया है । इजराइल के हमलों से 60000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और ये सिलसिला अभी भी जारी है । इस प्रस्ताव को लाकर ट्रंप ने साबित कर दिया है कि वो शांति चाहते हैं । हमास अगर समझौते को नहीं मानता है तो अमेरिका और अन्य देशों पर से यह दबाव खत्म हो जाएगा कि गाजावासियों की हत्याओं को रोकने के लिए कोई कुछ नहीं कर रहा है । इस प्रस्ताव को लाकर ट्रंप ने मुस्लिमों से उनका विक्टिम कार्ड छीन लिया है । अगर हमास मान जाता है तो गाजा पर अमेरिका का नियंत्रण हो जाएगा और अगर नहीं मानता है तो इजराइल को गाजा पर हमले की खुली छूट मिल जाएगी । देखा जाए तो अब इजराइल के हमलों के लिए हमास को ही जिम्मेदार माना जाएगा क्योंकि उसने शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है । इस प्रस्ताव को मुस्लिम देशों के नेताओं द्वारा इसलिए स्वीकार कर लिया गया है क्योंकि उनके ऊपर उनकी जनता का दबाव है । जनता चाहती है कि इजराइल के हमले रूक जाएं और गाजावासियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाए । इस प्रस्ताव के बाद मुस्लिम शासकों के ऊपर से जनता का दबाव कम हो सकता है ।
ट्रंप ने एक ट्रैप लगाया है और दुनिया उसमें फंस गई है । विशेष रूप से मुस्लिम देश ट्रंप के ट्रैप में फंस गए हैं जबकि वो प्रस्ताव की हकीकत को जानते हैं । इस प्रस्ताव को लाकर ट्रंप ने दिखा दिया है कि वो एक चतुर व्यापारी हैं । इस प्रस्ताव के बाद गाजा पर अमेरिका का पूर्ण नियंत्रण होने वाला है, चाहे हमास हां करे या न करे । अमेरिका गाजा को एक महत्वपूर्ण पर्यटन और व्यापार केंद्र बनाना चाहता है । इससे अमेरिका को आर्थिक लाभ तो होगा ही, इसके साथ-साथ उसे एक और महत्वपूर्ण ठिकाना मिल जाएगा । सबसे बड़ी बात, इजराइल को हमास से छुटकारा भी मिल जाएगा । फिलिस्तीन को इस समझौते से क्या मिलेगा, अभी कुछ नहीं कहा जा सकता । अंत में सबसे बड़ी बात यह है कि शांति प्रस्ताव में सब कुछ स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण आगे चलकर अमेरिका इस प्रस्ताव को कोई भी रूप दे सकता है ।
