
वंदना घनश्याला
छुटटी हुई ख़त्म भैया, चलो स्कूल चलें
कर लो काम ख़त्म, न चले ये
ये सब टाल मटोल..
अब जीने का ढंग बदल जाएगा
अलार्म जो बज जाएगा
देर तक जो भी सोता रह जाएगा, वो कार्य कैसे कर पाएगा
जीवन को है गर जीना तो अनुशासन बिन कैसे पाएगा
चलो स्कूल भैय्या! अब मस्ती निकल गई
देर तक सोना जागना सब खत्म हो जाएगा
खाने पीने का सब समय भी बंध जाएगा
माँ बोली मुझे भी अब समय मिल जाएगा
फोन और रिमोट से छुटकारा मिल जाएगा
पिताजी बोले और घर का माहौल सुधर जाएगा
चलो करो सब काम पूरा अब छुट्टी हुई खत्म!! बेटा चलो स्कूल चलें
छुटटी हुई ख़त्म भैया, चलो स्कूल चलें
कर लो काम ख़त्म, न चले ये
ये सब टाल मटोल..
