
संजय एम तराणेकर
तुम आए तो आया हैं ‘मुझे’ सब याद,
यूंहीं तुमने की थी आने की फरियाद।
कस्मे तो तुम ही खाते रहें न आने की,
हमने कभी बात नहीं की हैं जाने की।
सिहर उठता है ‘मन’ पिछली यादों से,
जोशीलें संवाद, हरकतों एवं इरादों से।
क्या? हस्ती बनी दुनिया की नजरों में,
नज़रें नीची हो गई ‘खुद’ की नजरों में।
यूं करिए दूरियों को मिटाने का प्रयास,
जिसका सभी को हो भरपूर आभास।
धुल जाए पिछले ‘ग़लत’ हुए व्यवहार,
याद रख़ो यहीं तो है तुम्हारे पालनहार।
