
संयुक्त राष्ट्र/नयी दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1990 के बाद से दुनिया भर में आधुनिक गर्भनिरोधक तरीकों का उपयोग दोगुना हो गया है। लेकिन करीब 22.4 करोड़ महिलाएं खासकर, विकासशील देशों में अब भी सुरक्षित और प्रभावी परिवार नियोजन साधनों का उपयोग नहीं कर पा रही हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आधुनिक गर्भनिरोधक उपायों का बढ़ता उपयोग एक बड़ी स्वास्थ्य सफलता है। इससे लाखों युवाओं को अनचाही गर्भावस्था से बचने और अपने भविष्य के बारे में फैसला करने की आजादी मिली है। हालांकि यूएनएफपीए ने चेतावनी दी है कि बहुत से लोगों के लिए अब भी यह मूल मानव अधिकार ‘बच्चों को जन्म देने या न देने का फैसला’ सीमित बना हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र संस्था ने बताया कि गर्भनिरोधक की अनुपलब्धता से अनचाही गर्भावस्थाओं में बढ़ोतरी होती है और असुरक्षित गर्भपात के कारण मातृ मृत्यु दर भी बढ़ती है। इसके साथ ही किशोरियों में प्रारंभिक गर्भधारण, स्कूल छोड़ने की दर और लैंगिक हिंसा के मामलों में भी वृद्धि देखी जाती है।
यूएनएफपीए की कार्यकारी निदेशक दीने केइता ने कहा कि गर्भनिरोधक जीवन बचाते हैं और आर्थिक रूप से भी लाभदायक हैं। उनके अनुसार गर्भनिरोधक की जरूरत पूरी करने पर खर्च किया गया हर एक डॉलर लगभग 27 डॉलर का आर्थिक लाभ देता है।
रिपोर्ट में गर्भनिरोधक से जुड़ी आम भ्रांतियों पर भी प्रकाश डाला गया है। यूएनएफपीए ने स्पष्ट किया है कि आधुनिक गर्भनिरोधक सुरक्षित हैं और अनचाही गर्भावस्था से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम किसी भी गर्भनिरोधक विधि से अधिक समस्या वाले होते हैं। संस्था ने यह भी कहा कि गर्भनिरोधक गर्भपात नहीं कराते, बल्कि गर्भधारण को रोकते हैं। इसी तरह गर्भनिरोधक का उपयोग बांझपन का कारण भी नहीं बनता, हालांकि कुछ हार्मोनल तरीकों से माहवारी अस्थायी रूप से रुक सकती है।
यूएनएफपीए के अनुसार प्राकृतिक तरीके जैसे कि कैलेंडर या तापमान मापने की विधियाँ गर्भधारण रोकने में कम प्रभावी हैं, जबकि आधुनिक तरीकों से सफलता की संभावना कहीं अधिक होती है। संस्था ने यह भी दोहराया कि अविवाहित व्यक्तियों या ऐसे लोगों को भी गर्भनिरोधक उपयोग करने का अधिकार है जिनके साथी इसके पक्ष में नहीं हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि युवाओं को जब प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी और सेवाएं मिलती हैं, तो वे अधिक जिम्मेदारी से फैसले लेते हैं। किसी व्यक्ति पर बिना सुरक्षा के यौन संबंध बनाने का दबाव डालना प्रजनन अधिकारों का हनन और दुर्व्यवहार की श्रेणी में आता है।
