
नई दिल्ली ,”विश्व आज अशांति के कगार पर खड़ा है। भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल मंत्र ‘ वसुधैव कुटुम्बकम ‘ ही विश्व में शांति स्थापित कर सकता है।सत्य, अहिंसा और सांप्रदायिक सद्भाव से मानवता का कल्याण किया जा सकता है।हम सभी को एकजुट होकर इसके लिए समवेत प्रयास करने होंगे।नई पीढ़ी को हम सुखद और समृद्ध विश्व सोंपे, जिससे मानवता कल्याण के मार्ग पर प्रशस्त हो सके।” उक्त विचार नागरी लिपि परिषद के महामंत्री और न्यूयॉर्क, अमेरिका से प्रकाशित वैश्विक हिंदी पत्रिका ‘सौरभ’ के प्रधान संपादक डॉ हरिसिंह पाल ने भारतीय अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र, गुरुग्राम और चाणक्य वार्ता द्वारा आयोजित ‘ श्रीमती कांति जैन वार्षिक व्याख्यान माला -2025’ में स्वागताध्यक्ष के रूप में व्यक्त किए। इस व्याख्यान माला के आयोजन में देश विदेश में नागरी लिपि का प्रचार प्रसार करने वाली प्रतिनिधि संस्था नागरी लिपि परिषद नई दिल्ली, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय, कोरापुट, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी, महाराजा सुहेल देव राज्य विश्वविद्यालय, आजमगढ़, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ और रिसर्च फाउंडेशन,नई दिल्ली ने विशेष सहयोग दिया। आयरलैंड के डॉ अभिषेक त्रिपाठी के कुशल संचालन में इसकी अध्यक्षता कोरापुट के कुलपति डॉ एन सी पांडा ने की। भारत सरकार के पूर्व विदेश सचिव श्री शशांक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस व्याख्यान माला में यूक्रेन के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ यूरी बोत्सविंकन, आर्मेनिया की प्राध्यापिका डॉ ऋप्सिने नेर्सिस्यान,टोकियो, जापान की हिंदी सेवी डॉ रमा पूर्णिमा शर्मा, बेलफास्ट विश्वविद्यालय के प्रो डॉ एम सतीश कुमार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव श्री श्याम परांठे और कोरिया विश्वविद्यालय के शोध छात्र श्री आशुतोष कुमार मिश्र ने विषय का प्रतिपादन किया।
कार्यक्रम के संयोजक और चाणक्य वार्ता के प्रधान संपादक डॉ अमित कुमार जैन ने इस व्याख्यानमाला के उद्देश्य और लक्ष्यों पर प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन चाणक्य वार्ता, सिलीगुड़ी के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार श्री कैलाश कंदोई ने प्रस्तुत किया। इस आभासी व्याख्यानमाला में चेन्नई की नागरी लिपि हिंदी सेवी श्रीमती श्रीदेवी, नागरी लिपि परिषद के संयुक्त मंत्री श्री अरुण कुमार पासवान,नाशिक के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ पोपट राव कोटमे, पुणे के शोध छात्र श्री जयवीर सिंह, आगरा के कवि श्री अनिल शर्मा सहित देश विदेश के अनेक बुद्धिजीवी और शोध छात्र – छात्रा जुड़े।
